नीट पीजी राउंड 1 का प्रोविजनल परिणाम जारी
मेडिकल काउंसलिंग कमिटी ने नीट पीजी काउंसलिंग के पहले राउंड का प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट रिजल्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in पर जारी कर दिया है। इस साल की काउंसलिंग प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव स्पष्ट रूप से देखा गया है। जनरल मेडिसिन विषय अब एमबीबीएस स्नातकों के बीच सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर सामने आया है। नीट पीजी के 100 टॉपरों में से 50 ने पीजी अध्ययन के लिए जनरल मेडिसिन को चुना है। यह रुझान केवल शीर्ष रैंक तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर भी देखा जा रहा है। टॉप 1000 रैंकर्स में जनरल मेडिसिन चुनने वालों की संख्या पिछले वर्ष 373 थी जो अब बढ़कर 390 हो गई है। इसी तरह, टॉप 10,000 रैंकर्स में यह आंकड़ा 1,181 से बढ़कर 1,253 तक पहुंच गया है। यह स्पष्ट करता है कि डॉक्टर अब अपनी पढ़ाई के लिए अधिक स्थिरता और संतुलित करियर वाले विषयों को प्राथमिकता दे रहे हैं। काउंसलिंग के इस प्रोविजनल परिणाम के साथ ही उम्मीदवारों के लिए शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। परिणाम में किसी भी तरह की विसंगति होने पर अभ्यर्थी आधिकारिक पोर्टल पर मौजूद रिड्रेसल सिस्टम के जरिए 24 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:30 बजे तक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
रेडियोलॉजी की मांग में कमी और अन्य बदलाव
काउंसलिंग के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि रेडियोलॉजी, जो कभी डॉक्टरों की बेहद पसंदीदा ब्रांच हुआ करती थी, उसकी मांग में गिरावट आई है। टॉप 100 रैंकर्स के बीच रेडियोलॉजी चुनने वालों की संख्या 2025 में 40 थी, जो अब घटकर 28 रह गई है। टॉप 1000 रैंकर्स के स्तर पर भी यह मांग 306 से कम होकर 293 दर्ज की गई है। हालांकि, टॉप 10,000 के समग्र स्तर पर रेडियोलॉजी में छात्रों की संख्या 1,091 से बढ़कर 1,132 हुई है। इसके विपरीत, न्यूक्लियर मेडिसिन का क्रेज तेजी से बढ़ा है, जिसमें टॉप 1000 रैंक के भीतर छात्रों की संख्या 11 से दोगुनी होकर 23 हो गई है। दूसरी तरफ, सर्जिकल और एनेस्थीसिया ब्रांचों की मांग में कमी दर्ज की गई है। टॉप 10,000 के भीतर एनेस्थिसियोलॉजी चुनने वाले छात्रों की संख्या 196 से घटकर 159 रह गई है, जबकि ऑप्थैल्मोलॉजी में यह आंकड़ा 225 से गिरकर 188 पर आ गया है। जनरल सर्जरी और ऑर्थोपेडिक्स के क्षेत्र में भी गिरावट देखी गई है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि अब चिकित्सा क्षेत्र के युवा डॉक्टर बेहतर वर्क लाइफ बैलेंस देने वाली ब्रांचों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जबकि अत्यधिक थकाऊ आपातकालीन और सर्जिकल सेवाओं के प्रति रुझान कम हुआ है।
काउंसलिंग प्रक्रिया और भविष्य के कदम
नीट पीजी काउंसलिंग के इस पहले चरण के प्रोविजनल परिणामों के बाद अब फाइनल अलॉटमेंट रिजल्ट घोषित किया जाएगा। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रोविजनल सूची पर आपत्तियों के निवारण के बाद ही फाइनल अलॉटमेंट जारी होगा। जिन उम्मीदवारों को सीटें आवंटित की गई हैं, उन्हें अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही संबंधित कॉलेजों में रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। इस काउंसलिंग प्रक्रिया के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो साइकियाट्री जैसे विषयों में भी रुचि बढ़ती दिख रही है, जहां टॉप 10,000 में छात्रों की संख्या 130 से बढ़कर 157 हो गई है। मेडिकल जगत में यह बदलाव डॉक्टरों की कार्यशैली और प्राथमिकताओं में आ रहे बड़े बदलाव को दर्शाता है। वे अब उन विषयों को चुनना पसंद कर रहे हैं जो कम तनावपूर्ण हैं और बेहतर जीवन शैली प्रदान करते हैं। यह प्रक्रिया नीट पीजी के माध्यम से देश भर के मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों के आवंटन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मेडिकल काउंसलिंग कमिटी लगातार इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही है ताकि सभी उम्मीदवारों को निष्पक्ष रूप से सीटें मिल सकें। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अपनी सीट अलॉटमेंट के बारे में नवीनतम जानकारी के लिए नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें और निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें ताकि उनका प्रवेश सुरक्षित हो सके।