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चंडीगढ़ अपडेट: पीटीएम में अभिभावकों को गैजेट-फ्री संडे के लिए प्रेरित करेंगे शिक्षक

चंडीगढ़ में अभिभावक-शिक्षक बैठक के दौरान शिक्षकों द्वारा एक नया कदम उठाया जाएगा। शिक्षक माता-पिता को रविवार के दिन बच्चों के लिए स्क्रीन का उपयोग पूरी तरह बंद करने हेतु प्रेरित करेंगे। यह पहल आधुनिक तकनीक के दौर में बच्चों की जीवनशैली को सुधारने के लिए बनाई गई है।

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Ankit Yadav
29 सित 2026, 17:27
चंडीगढ़ अपडेट: पीटीएम में अभिभावकों को गैजेट-फ्री संडे के लिए प्रेरित करेंगे शिक्षक

अभिभावक बैठक में डिजिटल उपवास की तैयारी

चंडीगढ़ के शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित होने वाली आगामी अभिभावक-शिक्षक बैठकों का मुख्य एजेंडा अब बदल रहा है। शिक्षक इन बैठकों के दौरान माता-पिता से विशेष रूप से संवाद स्थापित करेंगे। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य परिवारों को डिजिटल उपकरणों से दूर रखना है। आधुनिक समय में बढ़ते स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए यह पहल शुरू की गई है। शिक्षक माता-पिता को समझाएंगे कि सप्ताह में कम से कम एक दिन पूरी तरह स्क्रीन रहित होना चाहिए। इस विशेष दिन को गैजेट-फ्री संडे के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान बच्चे मोबाइल फोन और टैबलेट जैसी चीजों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इसके स्थान पर परिवार के सभी सदस्य आपस में समय बिताएंगे। माता-पिता बच्चों के साथ खेलेंगे और पारंपरिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। शिक्षकों का यह मानना है कि यह कदम बच्चों के मानसिक विकास के लिए बहुत जरूरी है। स्कूलों की तरफ से इस संबंध में पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। बैठक में आने वाले सभी अभिभावकों को इस बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। शिक्षकों का यह प्रयास बच्चों की डिजिटल लत को छुड़ाने में सहायक साबित होगा। माता-पिता भी इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने के लिए आगे आ रहे हैं।

स्क्रीन टाइम घटाने के लिए शिक्षकों की खास पहल

चंडीगढ़ के विद्यालयों में शिक्षकों ने बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा निर्णय लिया है। शिक्षक अभिभावक बैठकों के माध्यम से घर-घर तक यह संदेश पहुंचाना चाहते हैं। आज के समय में छोटे बच्चों में भी मोबाइल देखने की आदत तेजी से बढ़ रही है। इस आदत के कारण बच्चों की आंखों और दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। शिक्षक माता-पिता के साथ चर्चा करके उन्हें इन दुष्परिणामों से अवगत कराएंगे। बैठकों के दौरान शिक्षकों द्वारा विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में बताया जाएगा कि कैसे बच्चे अपना अधिकांश समय स्क्रीन के सामने बिता रहे हैं। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए गैजेट-फ्री संडे का विचार सामने रखा गया है। शिक्षक अभिभावकों से आग्रह करेंगे कि वे रविवार के दिन घर का सारा डिजिटल सामान दूर रखें। कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल फोन जैसे उपकरणों का प्रयोग उस दिन पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए। इसके बदले माता-पिता बच्चों को आउटडोर गेम्स खेलने के लिए प्रेरित करें। किताबें पढ़ने और रचनात्मक कार्यों में बच्चों की रुचि बढ़ाई जानी चाहिए। शिक्षक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि परिवार का साथ मिलने से बच्चे तकनीक से खुद दूर हो जाएंगे। स्कूल प्रशासन का मानना है कि इस मुहिम से बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए पृष्ठभूमि

वर्तमान डिजिटल युग में बच्चों का स्क्रीन के प्रति बढ़ता आकर्षण शिक्षकों और मनोवैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन चुका है। इसी पृष्ठभूमि में चंडीगढ़ के स्कूलों ने अभिभावक बैठकों को जागरूकता का माध्यम बनाने का फैसला किया है। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों की शारीरिक और मानसिक गतिविधियों में भारी कमी आई है। बच्चे खेल के मैदानों की बजाय वीडियो गेम और सोशल मीडिया में अधिक समय बिताते हैं। इसके कारण उनमें मोटापे और चिड़चिड़ेपन जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गैजेट-फ्री संडे जैसी अवधारणाएं बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। स्कूल स्तर पर यह प्रयास बच्चों को एक स्वस्थ जीवनशैली की ओर मोड़ने का एक मजबूत प्रयास है। शिक्षाविदों का कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही बच्चों को तकनीक के अत्यधिक इस्तेमाल से रोक लिया जाए तो उनका भविष्य सुरक्षित हो सकता है। आने वाले दिनों में इस मुहिम के तहत स्कूलों में कई अन्य जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा सकते हैं। अभिभावकों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए अपनी सहमति जताई है। सभी का यही प्रयास है कि बच्चे तकनीक के गुलाम न बनकर उसका सही उपयोग करना सीखें। इस प्रकार चंडीगढ़ के शिक्षण संस्थानों का यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है।

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