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शिक्षा

नई शिक्षा नीति के तहत राज्यों में शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर

नई शिक्षा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है।

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Kantap News डेस्क
29 जुल 2026, 16:20
नई शिक्षा नीति के तहत राज्यों में शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर

नई शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु देशभर में शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तेज कर दिया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों और डिजिटल उपकरणों के उपयोग में दक्ष बनाएं। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कक्षा में बच्चों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाना है। यह न केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रहेगा बल्कि बच्चों के रचनात्मक और विश्लेषणात्मक कौशल पर भी जोर दिया जाएगा। कई राज्यों ने पहले ही इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में वर्कशॉप आयोजित करना शुरू कर दिया है।

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को यह सिखाया जा रहा है कि कैसे वे छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझें और उन्हें उनकी गति के अनुसार पढ़ाएं। रटने की परंपरा को खत्म करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मंत्रालय का मानना है कि एक सक्षम शिक्षक ही एक सक्षम पीढ़ी का निर्माण कर सकता है। हर जिले में इसके लिए विशेष 'टीचर रिसोर्स सेंटर' की स्थापना की जा रही है। इन केंद्रों पर वरिष्ठ शिक्षकों द्वारा नए शिक्षकों को मेंटरशिप प्रदान की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले तीन वर्षों के भीतर देश के हर शिक्षक को इस नए पाठ्यक्रम के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाए।

शिक्षकों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि बदलते दौर में तकनीक का उपयोग अनिवार्य है। हालांकि, कुछ शिक्षकों का यह भी कहना है कि उन्हें प्रशासनिक कार्यों से मुक्त रखा जाए ताकि वे अपना पूरा ध्यान केवल शिक्षण पर केंद्रित कर सकें। सरकार इस दिशा में भी विचार कर रही है कि कैसे शिक्षण के अलावा होने वाले अन्य कार्यों का बोझ कम किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया में अभिभावकों को भी शामिल किया जा रहा है ताकि स्कूल और घर के बीच एक बेहतर सामंजस्य स्थापित हो सके। शिक्षा व्यवस्था में आया यह बदलाव आने वाले दशक में भारत की साक्षरता दर और गुणवत्ता को नए आयामों तक पहुंचाएगा।

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