कंटाप
NEWS
सोमवार, 31 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल में मलबे से शवों को इस तरह खोज रहे हैं बचाव दल के सदस्य      PM मोदी को उज्बेकिस्तान से मिला सम्मान तो बोले असदुद्दीन ओवैसी- 'बाबर के देश से अवार्ड, BJP वालों को मुबारकबाद'      दिल्ली फिर शर्मसार! स्लीपर बस में 16 साल की लड़की से गैंगरेप, 47km तक दरिंदगी      ट्रंप के टैरिफ की मोदी ने निकाली काट, बदली विदेश नीति; अमेरिकी अखबार भी करने लगा तारीफ      अमेरिका ने ईरान पर एक महीने बाद फिर हमला किया: होर्मुज के पास रॉकेट लॉन्चर्स पर निशाना; ईरान ने जवाब में जॉ...      मक्का समझौते में शामिल होने में कोई रिस्क नहीं, बांग्लादेश के बिगड़ रहे बोल; भारत पर निशाना?      संघ प्रमुख का वो ‘बोरिंग‘ भाषण, जिसने ममदानियों का मूड खराब कर दिया!      राहुल गांधी पर हल्द्वानी में FIR, 'शुद्धिकरण' पर सियासी घमासान, SC-ST एक्ट में दर्ज हुआ केस     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
शिक्षा

नवाचार की तलाश: बीएसए ने सीखो-सिखाओ पद्धति पर दिया जोर

शिक्षा विभाग में गुणात्मक सुधार लाने और नई कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने 'सीखो-सिखाओ' के जरिए नवाचार की तलाश करने का अनूठा संकल्प लिया है।

A
Ankit Yadav
31 अग 2026, 12:44
नवाचार की तलाश: बीएसए ने सीखो-सिखाओ पद्धति पर दिया जोर
बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में नित नए प्रयोगों और शिक्षण विधियों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शिक्षा अधिकारियों का मानना है कि केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय यदि शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच परस्पर ज्ञान के आदान-प्रदान का वातावरण तैयार किया जाए, तो शैक्षणिक स्तर में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिल सकता है। इसी सोच के तहत 'सीखो-सिखाओ' अभियान को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारी की जा रही है, ताकि विद्यालयों में रचनात्मकता और नई कार्यशैली को प्रोत्साहित किया जा सके।

शिक्षण संस्थानों में रचनात्मकता और आधुनिक दृष्टिकोण

आज के समय में शिक्षा प्रणाली को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता है। विद्यालयों में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की तार्किक क्षमता और सोचने के दायरे को बढ़ाना बेहद आवश्यक हो गया है। बेसिक शिक्षा विभाग इस बात पर विशेष जोर दे रहा है कि शिक्षकगण भी आपस में अपने अनुभवों को साझा करें और जो तकनीकें एक विद्यालय में सफल साबित हुई हैं, उन्हें अन्य विद्यालयों में भी लागू किया जाए। इस आदान-प्रदान की प्रक्रिया से न केवल पठन-पाठन का माहौल सुधरेगा, बल्कि शिक्षकों को भी अपनी शिक्षण शैलियों को और अधिक उन्नत बनाने का अवसर मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर नवाचार को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा, तब तक शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित और सकारात्मक परिणाम प्राप्त करना कठिन होगा। इस पूरी पहल का मुख्य केंद्रबिंदु यह है कि कैसे शिक्षण प्रक्रिया को अधिक सरल, रोचक और परिणाम-उन्मुख बनाया जा सके। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यशालाओं और बैठकों का आयोजन भी किया जा रहा है, जिनमें शिक्षकों को नए विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

भविष्य की योजनाएं और शिक्षकों की भागीदारी

आने वाले दिनों में इस पहल के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि इसमें प्रत्येक शिक्षक और छात्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है। विभाग द्वारा ऐसे शिक्षकों को विशेष रूप से सम्मानित और प्रोत्साहित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है जो अपनी कक्षाओं में कुछ नया और रचनात्मक कर रहे हैं। इस प्रकार की पहलों से पूरे प्रशासनिक ढांचे में एक नई ऊर्जा का संचार होता है और संपूर्ण शैक्षिक परिवेश में गुणात्मक सुधार की दिशा में एक ठोस कदम आगे बढ़ता है।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज