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स्किल गैप संकट: नीति आयोग की रिपोर्ट में रोजगारपरक शिक्षा के भारी अभाव का खुलासा
नीति आयोग की एक ताजा रिपोर्ट में देश की शिक्षा प्रणाली और रोजगार बाजार के बीच गहरी खाई को उजागर किया गया है, जिसमें स्किल गैप और रोजगारपरक शिक्षा की कमी पर चिंता जताई गई है।
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Ankit Yadav
30 अग 2026, 12:33
देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। नीति आयोग द्वारा जारी की गई एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारतीय युवाओं के पास आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुसार कौशल की भारी कमी है। इस रिपोर्ट ने देश में लगातार बढ़ रहे रोजगार संकट और पारंपरिक शिक्षा प्रणाली के बीच की विसंगतियों को उजागर किया है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते अकादमिक पाठ्यक्रम और व्यावहारिक कौशल प्रशिक्षण के बीच की इस खाई को पाटा नहीं गया, तो देश के जनसांख्यिकीय लाभांश को संभालना और भी कठिन हो जाएगा।
शिक्षा और कौशल में बड़ा अंतर
पारंपरिक शिक्षण संस्थान केवल किताबी ज्ञान पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे छात्रों को डिग्री तो मिल जाती है लेकिन वे कॉर्पोरेट जगत या तकनीकी क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों के लिए तैयार नहीं होते। रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत को जिन खास योग्यताओं और कौशलों की आवश्यकता होती है, उनका पाठ्यक्रम में पूर्ण अभाव है। यही वजह है कि लाखों युवा हर साल उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद नौकरी पाने में असफल रहते हैं या फिर उन्हें उनकी योग्यता से कम स्तर का काम चुनना पड़ता है। इस समस्या के कारण न केवल बेरोजगारी दर प्रभावित हो रही है, बल्कि देश की समग्र उत्पादकता और आर्थिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
नीतिगत सुधारों की सख्त जरूरत
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए नीति आयोग ने शिक्षा प्रणाली के पूर्ण कायाकल्प और वोकेशनल ट्रेनिंग यानी व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि स्कूली स्तर से ही छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के अवसर मिलने चाहिए। सरकार और निजी क्षेत्रों को मिलकर ऐसे ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार करने होंगे जो सीधे तौर पर रोजगार बाजार की मौजूदा जरूरतों से जुड़े हों। इसके साथ ही शिक्षकों को भी आधुनिक तकनीकी रुझानों के अनुसार प्रशिक्षित करना बेहद आवश्यक हो गया है ताकि वे छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें।
भविष्य की रणनीतियों पर विचार करते हुए कई शिक्षाविदों ने यह भी कहा है कि पाठ्यक्रम में लचीलापन लाना होगा ताकि तेजी से बदलती तकनीक और वैश्विक बाजार के बदलावों के साथ कदमताल किया जा सके। आने वाले समय में यदि इन सिफारिशों को गंभीरता से लागू किया जाता है, तो देश के युवाओं को रोजगार के बेहतर और स्थायी अवसर मिल सकेंगे। नीति आयोग की इस रिपोर्ट को देश के नीति निर्माताओं के लिए एक चेतावनी और दिशा-निर्देश दोनों के रूप में देखा जा रहा है, जिसपर अब त्वरित और ठोस कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है।