प्रस्तावित संशोधनों का मुख्य उद्देश्य और रूपरेखा
शिक्षा एवं प्रशिक्षण मंत्रालय की तरफ से विकलांग नागरिकों की पढ़ाई से जुड़े कुल पांच मौजूदा परिपत्रों में सुधार करने के लिए एक मसौदा तैयार किया गया है। मंत्रालय इस नए मसौदे पर लोगों की राय जुटा रहा है ताकि नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सके। इन बदलावों के पीछे मुख्य मकसद दो स्तरीय स्थानीय शासन व्यवस्था के अनुसार प्रबंधन की जिम्मेदारियों को सही से व्यवस्थित करना है। इसके साथ ही विकलांग नागरिकों को पढ़ाई का हक दिलाने के रास्ते में आने वाली तमाम व्यावहारिक बाधाओं को दूर करना भी इसमें शामिल है। अनिवार्य तथा सार्वभौमिक शिक्षा के दायरे में नए नियमों को शामिल करना भी इस बदलाव का एक अहम हिस्सा है। इस पूरी प्रक्रिया का लक्ष्य पढ़ाई और सीखने के माहौल में लचीलापन लाना है। विकलांग व्यक्तियों को समाज और सामान्य जीवन के साथ जोड़ने के लिए शैक्षिक लक्ष्यों को और अधिक साफ शब्दों में परिभाषित किया गया है। इन सभी नीतियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू करने की प्रक्रियाओं को भी इस मसौदे में काफी स्पष्ट किया गया है ताकि किसी भी तरह की दुविधा न रहे।
स्थानीय निकायों और कम्यून स्तर पर नई जिम्मेदारियां
इस नए प्रस्ताव के तहत शिक्षा प्रबंधन से जुड़े कामों और स्थानीय निकायों की भूमिका में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जो अधिकार मुख्य रूप से जिला स्तर या वहां की विशेष एजेंसियों के पास थे, उन्हें अब कम्यून स्तर की जन समितियों को सौंप दिया गया है। इसके अलावा प्रांतीय जन समितियों और शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभागों की देखरेख और मार्गदर्शन की भूमिका को भी और ज्यादा स्पष्ट कर दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार कम्यून स्तर की जन समिति अपने इलाके में चलने वाली विशेष शिक्षा कक्षाओं वाले स्कूलों के संचालन का निरीक्षण और मार्गदर्शन करेगी। साथ ही ये समितियां अपने संसाधनों और अधिकार क्षेत्र के भीतर सार्वजनिक संस्थानों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए निवेश भी करेंगी। समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में ये कम्यून समितियां विशेष योजनाएं बनाकर उन्हें लागू करने का काम संभालेंगी। विकलांग लोगों को पढ़ाई में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करने और नीतियों के सही क्रियान्वयन की निगरानी की जिम्मेदारी भी इन्हीं समितियों की होगी। जरूरत पड़ने पर ये निकाय अपने कामकाज के परिणामों की रिपोर्ट भी सौंपेंगे। इसके अतिरिक्त कम्यून स्तर की समितियां तयशुदा समूहों के विकलांग लोगों के लिए छात्रवृत्ति के पैसों के प्रबंधन और वितरण का काम भी देखेंगी। पढ़ने लिखने की सामग्री और जरूरी उपकरण खरीदने के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता का प्रबंधन और आयोजन भी यही समितियां करेंगी।
व्यावसायिक कौशल और शिक्षकों के लिए प्रमाणन की समयसीमा
मसौदे में प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत क्षमताओं और जरूरतों के आधार पर शैक्षिक गतिविधियों को आयोजित करने पर जोर दिया गया है। विकलांग व्यक्तियों के लिए विशेष शिक्षा, अर्ध-समावेशी शिक्षा और सामान्य समावेशी शिक्षा के बीच के आपसी तालमेल को भी बढ़ाया गया है। समावेशी शिक्षा सहायता केंद्रों और विशेष विद्यालयों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक कौशल और विशेष कौशल शिक्षा का प्रावधान किया गया है। यह सामग्री पूर्व-विद्यालय से लेकर सामान्य शिक्षा, साक्षरता कार्यक्रमों, सतत शिक्षा और व्यावसायिक हाई स्कूल के कार्यक्रमों के साथ जोड़ी जाएगी। स्कूल अब विकलांग छात्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षण सामग्री में बदलाव कर सकेंगे। निम्न माध्यमिक स्तर पर साक्षरता और सतत शिक्षा को जोड़ने का मुख्य उद्देश्य तय उम्र के बाद भी पढ़ाई करने वाले विकलांग व्यक्तियों की समस्याओं का समाधान करना है। इसके साथ ही प्रशासकों और शिक्षकों की पेशेवर दक्षता को सुधारने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी तय किया गया है। विशेष विद्यालयों और सहायता केंद्रों के प्रधानाचार्यों तथा निदेशकों को अपने जरूरी प्रमाण पत्र पूरे करने के लिए नियुक्ति की तारीख से 3 साल का समय दिया गया है। इसी तरह इन संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को अपने प्रमाण पत्र पूरे करने के लिए निर्णय की तिथि से 1 साल का समय मिलेगा ताकि संक्रमण काल को आसानी से पार किया जा सके।