परीक्षा में नहीं बैठी छात्रा फिर भी पास
छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय से जुड़े एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई का एक अजीब मामला सामने आया है। यहां बीटेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पाठ्यक्रम के चौथे सेमेस्टर के दौरान एक बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। इस पाठ्यक्रम के डिस्क्रीट स्ट्रक्चर विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी जिसमें संबंधित छात्रा ने हिस्सा नहीं लिया था और वह पूरी तरह से अनुपस्थित रही थी। इसके बावजूद जब इस विषय का परिणाम घोषित किया गया तो उस छात्रा के अंक तालिका में अड़तीस नंबर दर्ज मिले। केवल अंक ही नहीं जोड़े गए बल्कि उसे उस परीक्षा में सफल भी घोषित कर दिया गया। जब परीक्षा परिणाम सबके सामने आया तो सहपाठियों ने इस पर गहरी हैरानी जताई और तुरंत विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग के समक्ष अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। विद्यार्थियों का सीधा सवाल था कि जो लड़की परीक्षा हॉल में आई ही नहीं और जिसने पर्चा लिखा ही नहीं, उसके नाम पर अंक किस तरह चढ़ा दिए गए। इस अप्रत्याशित स्थिति के सामने आने से विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे और हर तरफ इसी बात की चर्चा होने लगी कि आखिर ऐसा कैसे संभव हो गया।
शिकायत के बाद रिकॉर्ड की हुई जांच
सहपाठियों की ओर से शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग हरकत में आया और तुरंत मामले की छानबीन शुरू कर दी गई। जांच दल ने सबसे पहले उस परीक्षा से जुड़े सभी पुराने दस्तावेजों और फाइलों की बारीकी से पड़ताल की। इस दौरान छात्रा की उत्तरपुस्तिका यानी आंसर शीट और परीक्षा केंद्र की उपस्थिति पंजी को विशेष रूप से जांच के दायरे में लिया गया। रिकॉर्ड की इस लंबी और गहरी पड़ताल के दौरान यह बात पूरी तरह साफ हो गई कि वह छात्रा वाकई उस दिन परीक्षा में मौजूद नहीं थी। उपस्थिति रजिस्टर में उसकी अनुपस्थिति दर्ज थी और उत्तरपुस्तिका भी खाली थी जिससे यह साबित हो गया कि शुरुआती परिणाम में भारी विसंगति हुई है। इस पुष्टि के बाद परीक्षा विभाग ने तुरंत अड़तीस अंकों को हटाने और परिणाम को सुधारने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी। जांच पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय ने छात्रा का नया संशोधित परिणाम जारी कर दिया ताकि शुरुआती स्कोर और परीक्षा की वास्तविक स्थिति के बीच का यह अंतर पूरी तरह से खत्म किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया ने परीक्षा परिणाम तैयार करने वाली एजेंसी की भूमिका को भी संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस एजेंसी को एक औपचारिक नोटिस भेजकर तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
विश्वविद्यालय स्तर पर एजेंसी की भूमिका पर सवाल
इस पूरी घटना के बाद से विश्वविद्यालय के भीतर यह पता लगाने का काम तेजी से चल रहा है कि यह बड़ी चूक किस स्तर पर हुई। परिणाम तैयार करने से लेकर उसे ऑनलाइन अपलोड करने तक की पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जा रही है। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर इस संबंध में सभी जरूरी सूचनाएं और परिणाम विद्यार्थियों के देखने के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं। विश्वविद्यालय स्पष्ट रूप से यह बताता है कि वेबसाइट पर दिखने वाले परिणाम केवल पहली जानकारी के रूप में होते हैं। किसी भी परिणाम की अंतिम प्रामाणिकता और सत्यता के लिए सक्षम अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित टैबुलेशन शीट को ही मुख्य दस्तावेज माना जाता है। परिणामों में किसी भी तरह की समस्या या गड़बड़ी से निपटने के लिए विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों की सुविधा वास्ते एक अलग संपर्क व्यवस्था भी बनाई है ताकि वे अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। इस ताजा मामले ने एक बार फिर इस बात की सख्त जरूरत को सामने ला दिया है कि परीक्षा परिणाम तैयार करते वक्त, विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करते समय और अंतिम परिणाम जारी होने से पहले सभी रिकॉर्ड का सही से मिलान किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय के इस कदम से भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने की उम्मीद जताई जा रही है।