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शिक्षा

संघर्ष की मिसाल: कचरा बीनने वाली मां के बेटे ने क्रैक की यूपीएससी परीक्षा और बने आईएफएस अधिकारी

कठिन परिस्थितियों और आभाव के बीच जीने वाले एक परिवार के होनहार युवा ने अपनी मेहनत के दम पर देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर ली है। गली-गली जाकर कूड़ा-कचरा बीनने वाली मां के संघर्षों को पूंजी बनाकर इस बेटे ने आईएफएस अधिकारी बनकर पूरे समाज के सामने एक नई प्रेरणा पेश की है।

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Ankit Yadav
24 सित 2026, 11:58
संघर्ष की मिसाल: कचरा बीनने वाली मां के बेटे ने क्रैक की यूपीएससी परीक्षा और बने आईएफएस अधिकारी

असाधारण सफलता की अनूठी दास्तान देशभर में कठिनतम मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में इस युवा ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए शानदार सफलता प्राप्त की है और भारतीय वन सेवा यानी आईएफएस के रूप में चयनित होकर अपनी योग्यता साबित की है। इस सफर की सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां का वह कड़ा संघर्ष रहा है जिन्होंने घर-घर और गली-गली जाकर कचरा बीनने का काम किया और किसी तरह अपने बच्चे की पढ़ाई लिखाई का खर्च उठाया। जब आर्थिक तंगी चरम पर होती है और दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता, तब इस तरह के मुकाम को हासिल करना यह साबित करता है कि यदि इरादे बुलंद हों और मेहनत में कोई कमी न छोड़ी जाए, तो हर बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है। इस युवा की यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन तमाम माता-पिता के त्याग की जीत है जो अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए खुद को झोंक देते हैं और किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते हैं।

संघर्ष और समर्पण की लंबी पृष्ठभूमि सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षाओं को पास करने के पीछे वर्षों की लंबी तपस्या, अटूट अनुशासन और त्याग की एक पूरी कहानी होती है जिसके बारे में आम लोग अक्सर अनजान रहते हैं। इस विशेष मामले में पृष्ठभूमि और भी अधिक भावुक कर देने वाली है क्योंकि संसाधनविहीन परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस मेधावी छात्र ने हर कदम पर वित्तीय और सामाजिक दोनों प्रकार की चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे परिवारों में जहां रोजाना की आजीविका चलाना ही सबसे बड़ा संकट होता है, वहां उच्च शिक्षा के लिए किताबें जुटाना, कोचिंग की व्यवस्था करना या इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं प्राप्त करना भी पहाड़ जैसा काम होता है। हालांकि, इन तमाम बाधाओं के बावजूद इस युवा ने अपनी लगन से कभी समझौता नहीं किया और अपनी मां के पसीने की हर एक बूंद का मान रखते हुए अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस तरह के उदाहरण इस बात को रेखांकित करते हैं कि यदि देश के दूर-दराज और वंचित कोनों तक प्रतिभा को सही मंच और अवसर मिले, तो युवा अपनी मेहनत के बल पर भाग्य की रेखाओं को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखते हैं।

भविष्य की राह और व्यापक असर इस गौरवशाली उपलब्धि के बाद अब इस नवनियुक्त आईएफएस अधिकारी के जीवन का एक नया और अधिक जिम्मेदारी भरा अध्याय शुरू होने जा रहा है जहां उन्हें देश की प्रशासनिक व्यवस्था में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। भारतीय वन सेवा के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य शामिल होते हैं, जिनमें उनकी यह मेधा और संवेदनशीलता बहुत काम आएगी। इस तरह की सफलताएं केवल एक परिवार या एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे पूरे समाज में एक सकारात्मक संदेश प्रसारित करती हैं और हजारों अन्य छात्र-छात्राओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करती हैं जो संसाधनों की कमी के कारण अक्सर हिम्मत हार जाते हैं। जब एक साधारण पृष्ठभूमि से उठकर कोई युवा देश के सर्वोच्च पदों पर पहुंचता है, तो इससे पूरी व्यवस्था में आम जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होता है और यह इस बात का प्रमाण बनता है कि लोकतंत्र में प्रतिभा ही सबसे बड़ी पहचान है। आने वाले समय में इस अधिकारी से यह उम्मीद की जाएगी कि वे अपने सेवाकाल के दौरान पर्यावरण और वन संपदा के संरक्षण में अपनी पूरी ईमानदारी और क्षमता का परिचय देंगे।

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