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शिक्षा जगत में बदलाव: नई राष्ट्रीय नीति के तहत अनिवार्य हुआ कोडिंग का नया पाठ्यक्रम

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने आज कक्षा 6 से लेकर 12वीं तक के लिए अनिवार्य कोडिंग पाठ्यक्रम का ऐलान किया है।

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Kantap News डेस्क
06 अग 2026, 15:18
शिक्षा जगत में बदलाव: नई राष्ट्रीय नीति के तहत अनिवार्य हुआ कोडिंग का नया पाठ्यक्रम

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने आज एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए देश भर के स्कूलों में कोडिंग को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की घोषणा की है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, अब छठी कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के छात्र पाइथन और जावा जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं का अध्ययन करेंगे। मंत्रालय का मानना है कि आने वाले दशक में रोजगार के बाजार को देखते हुए यह बदलाव आवश्यक है। सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 2027 के शैक्षणिक सत्र से पहले अपनी प्रयोगशालाओं को अपग्रेड करने का निर्देश दिया गया है।

छात्रों और शिक्षकों पर पड़ेगा प्रभाव इस फैसले से छात्रों में तार्किक क्षमता और समस्या सुलझाने के कौशल में सुधार होगा। हालांकि, शिक्षकों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि उन्हें नई तकनीकों के साथ खुद को अपडेट करना होगा। सरकार ने इसके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए हैं, जो अगले महीने से ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से शुरू होंगे। शिक्षकों को कोडिंग पढ़ाने के लिए गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी की गई है। छात्रों का कहना है कि यह एक स्वागत योग्य कदम है, क्योंकि इससे उन्हें भविष्य में स्टार्टअप शुरू करने में मदद मिलेगी।

अवसंरचना और डिजिटल पहुंच इस नीति का एक मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी स्कूलों के बीच की खाई को कम करना है। सरकार ने उन क्षेत्रों में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए विशेष बजट आवंटित किया है जहां इंटरनेट की पहुंच अभी भी कम है। छात्रों को मुफ्त टैबलेट और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी कोडिंग स्किल्स को निखार सकें। इस पहल को विशेषज्ञों ने 'डिजिटल इंडिया' की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान ही इसका कार्यान्वयन पूर्ण रूप से शुरू हो जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ी विश्वस्तरीय तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार होगी।

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