कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल में बाढ़ : चीन पर उठ रहे सवालों पर क्या कह रहा है अंतरराष्ट्रीय मीडिया      Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat LIVE: खत्म हुआ राहुकाल! फिर शुरू हुआ राखी का शुभ मुहूर्त, जानिए कब तक बां      अभिजीत दीपके ने अरविंद केजरीवाल को पछाड़ दिया! सर्वे में CJP चीफ ने चौंकाया      मुस्कान मर्डर केस में सामने आया CCTV वीडियो, हत्या के बाद भागता दिखा आरोपी इमरान      जोहरान ममदानी को RSS का करारा जवाब, X अकाउंट भी बहाल, मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा पर बड़ा अपडेट      पाकिस्तान ने फंसाया एक और ‘मुर्गा’, सऊदी अरब-तुर्की के बाद इस देश के साथ मिलिट्री डील, बदले में क्या मिलेगा...      रिजिजू ने दिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत, परिसीमन बिल पर टिकीं निगाहें; विपक्ष में हलचल      दिल्ली में ISI के जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश... स्पेशल सेल ने पति-पत्नी को किया गिरफ्तार, पाकिस्तान भेजते थे भारतीय SIM कार्ड     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
शिक्षा

शिक्षा का संकट: डॉ. अरुणा शर्मा के कॉलम में महंगी होती पढ़ाई पर गहरी चिंता व्यक्त

जाने-माने प्लेटफॉर्म दैनिक भास्कर में प्रकाशित डॉ. अरुणा शर्मा के नवीनतम कॉलम में शिक्षा के लगातार महंगे होते स्वरूप पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।

A
Ankit Yadav
25 अग 2026, 11:35
शिक्षा का संकट: डॉ. अरुणा शर्मा के कॉलम में महंगी होती पढ़ाई पर गहरी चिंता व्यक्त
देश में शिक्षा के तेजी से महंगे होते जा रहे स्वरूप ने अब नीति निर्धारकों और विचारकों को चिंतित करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में अपने हालिया कॉलम के माध्यम से डॉ. अरुणा शर्मा ने यह बड़ा सवाल उठाया है कि यदि गुणवत्तापूर्ण और उच्च शिक्षा आम आदमी की पहुँच से बाहर होती चली जाएगी, तो आने वाली पीढ़ियाँ अपना भविष्य कैसे सुरक्षित कर पाएँगी। आज के समय में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक, हर स्तर पर खर्च में बेतहाशा वृद्धि देखी जा रही है। इस स्थिति के कारण मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों के लिए अपने बच्चों को काबिल बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

शिक्षा का बढ़ता खर्च और भविष्य की चिंता

पारंपरिक सरकारी संस्थानों के सीमित दायरे और निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों की भारी-भरकम फीस के बीच आम विद्यार्थी पिस रहा है। स्थिति यह हो गई है कि बेहतरीन करियर की चाह रखने वाले युवाओं के परिवारों को भारी कर्ज के जाल में फंसना पड़ रहा है। डॉ. अरुणा शर्मा ने अपने इस विशेष आलेख में इसी कड़वी सच्चाई को उजागर किया है कि शिक्षा का यह व्यावसायिक मॉडल अंततः समाज के एक बड़े हिस्से को उच्च शिक्षा से वंचित कर देगा। जब ज्ञान और कौशल केवल उन्हीं लोगों तक सीमित रह जाएंगे जो भारी भरकम फीस चुकाने में सक्षम हैं, तब सामाजिक समानता का सपना और देश का भविष्य दोनों ही खतरे में पड़ जाएंगे। शिक्षा क्षेत्र में निजीकरण के बढ़ते दखल ने शिक्षण संस्थाओं को ज्ञान के मंदिरों के बजाय बड़े व्यापारिक उपक्रमों में बदल दिया है। कोचिंग संस्कृति, प्रवेश परीक्षाओं की भारी तैयारी का खर्च और सेमेस्टर फीस ने मिलकर शिक्षा को एक महंगा उत्पाद बना दिया है। ऐसे में यह सोचना लाजिमी है कि क्या प्रतिभाशाली बच्चे केवल वित्तीय तंगी के कारण अपनी मंजिल पाने से चूक जाएंगे। इस तरह के हालात देश के समग्र विकास के मार्ग में भी एक बड़ी बाधा बन सकते हैं क्योंकि एक शिक्षित युवा ही किसी भी राष्ट्र की असली पूँजी होता है।

समाधान और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि सरकारें और शिक्षाविद् मिलकर ठोस कदम उठाएँ। सरकारी शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढाचे को मजबूत करना और उनमें गुणवत्ता में सुधार लाना इस दिशा में पहला कदम हो सकता है ताकि कम खर्च पर बेहतरीन शिक्षा मिल सके। इसके अतिरिक्त, जरूरतमंद और मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाना होगा ताकि पैसे की कमी किसी के रास्ते की रुकावट न बने। डॉ. अरुणा शर्मा का यह कॉलम केवल एक लेख मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी वर्तमान शिक्षण व्यवस्था के नीति-निर्माताओं के लिए एक चेतावनी और आत्ममंथन का अवसर है। यदि समय रहते शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में इसके परिणाम बेहद निराशाजनक हो सकते हैं। समाज के हर वर्ग को साथ मिलकर इस बात पर विचार करना होगा कि ज्ञान और शिक्षा पर सभी का समान अधिकार कैसे सुनिश्चित किया जाए।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज