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शिक्षा की मिसाल: फरीदपुर की भावना राय बच्चों का संवार रही हैं भविष्य

फरीदपुर के प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षिका भावना राय ग्रामीण बच्चों को पढ़ा रही हैं। पारिवारिक बंदिशों के खिलाफ जाकर उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा पूरी की थी। आज वह करीब 150 बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजला प्रकाश फैला रही हैं।

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Ankit Yadav
16 अक्ट 2026, 13:35
शिक्षा की मिसाल: फरीदपुर की भावना राय बच्चों का संवार रही हैं भविष्य

प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को पढ़ा रहीं भावना

उत्तर प्रदेश के फरीदपुर इलाके में स्थित प्राथमिक विद्यालय करतोली में तैनात शिक्षिका भावना राय वर्तमान समय में लगभग 150 बच्चों को शिक्षित कर रही हैं। वह इन सभी बच्चों को केवल स्कूली किताबें ही नहीं पढ़ाती हैं, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास जगाने का काम भी करती हैं। इसके साथ ही बच्चों को अच्छे संस्कार सिखाना भी उनके दैनिक शिक्षण कार्य का मुख्य हिस्सा है। उनके लिए शिक्षण कार्य महज़ एक नौकरी नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचल के बच्चों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का एक सशक्त माध्यम है। वह पिछले करीब दस वर्षों से निरंतर शिक्षण कार्य से जुड़ी हुई हैं और बच्चों को पढ़ाने के लिए विभिन्न रचनात्मक तरीकों का उपयोग करती हैं। वह मुख्य रूप से गीतों, खेलों और कई तरह की अन्य गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को शिक्षा प्रदान करती हैं। चित्रकला, रंगोली, सिलाई-बुनाई, कढ़ाई और कविता लेखन जैसे क्षेत्रों में खुद गहरी रुचि रखने वाली भावना अपने विद्यालय के विद्यार्थियों की छुपी हुई प्रतिभा को पूरी तरह से निखारने पर भी बहुत अधिक जोर देती हैं। उनका यह निरंतर प्रयास रहता है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और ग्रामीण बच्चों को भी समाज में अन्य बच्चों की तरह ही बेहतरीन शिक्षा मिले।

पारिवारिक बंदिशों को तोड़कर पूरी की अपनी पढ़ाई

शिक्षिका भावना राय का जन्म एक बेहद प्रतिष्ठित परिवार के भीतर हुआ था। उनके बाबा जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रह चुके थे और इसके अलावा वह फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक की भूमिका भी निभा चुके थे। इस तरह के प्रतिष्ठित और राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उनके लिए उच्च शिक्षा हासिल करना बिल्कुल भी आसान नहीं था। जब वह फरीदपुर में गणित विषय की पढ़ाई करते हुए इंटरमीडिएट करना चाहती थीं, तब वहां बालिकाओं के लिए कोई भी अलग से कन्या विद्यालय मौजूद नहीं था। उनका परिवार चाहता था कि वह गणित के बजाय केवल कला वर्ग से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करें। हालांकि भावना ने कठिन परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी और अपनी जिद पर अड़ी रहीं। उनकी इसी जिद और दृढ़ संकल्प के आगे आखिरकार उनके परिवार को झुकना ही पड़ा और उन्हें सहशिक्षा वाले सीएएस इंटर कॉलेज के अंदर दाखिला दिलाना पड़ गया। इस प्रकार से वह फरीदपुर क्षेत्र के भीतर गणित विषय के साथ इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने वाली अपने इलाके की पहली लड़की बनने का गौरव प्राप्त कर सकीं। अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई के ठीक बाद उनके विवाह को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं, जिसके चलते उनकी शिक्षा के मार्ग में बाधा आई और उनका एक साल भी बर्बाद हो गया।

संघर्ष भरा सफर और गांवों में शिक्षा का प्रसार

विवाह की चर्चाओं और एक साल की बर्बादी के बाद भी भावना ने अपना हौसला नहीं खोया और अपना कड़ा संघर्ष पूरी तन्मयता के साथ जारी रखा। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर स्नातक की डिग्री पूरी की, उसके बाद परास्नातक किया और फिर शिक्षक प्रशिक्षण का कोर्स पूरा करते हुए आखिरकार बेसिक शिक्षा विभाग के अंदर सरकारी नौकरी हासिल करने में सफलता पा ली। चयन होने के बाद उनकी सबसे पहली तैनाती तराखास नाम के एक गांव के स्कूल में हुई थी। इसके बाद उनका तबादला प्राथमिक विद्यालय करतोली में कर दिया गया, जहां उनके सामने एक अलग तरह की बड़ी चुनौती मुंह बाए खड़ी थी। उस विद्यालय में बच्चों की संख्या बहुत कम थी और इसके अलावा स्थानीय अभिभावक अपनी बेटियों की शिक्षा को लेकर काफी हिचकिचाते थे। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए उन्होंने गांव के हर घर में व्यक्तिगत रूप से जाकर वहां के परिवारों को शिक्षा का असली महत्व समझाया। उनकी इस अनूठी पहल का असर यह हुआ कि धीरे-धीरे विद्यालय में आने वाले बच्चों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज होने लगी। कभी खुद अपनी पढ़ाई के लिए लंबा संघर्ष करने वाली भावना आज अपने गांव की अन्य बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें सच साबित करने का रास्ता दिखा रही हैं।

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