दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने आज एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों में आने वाले शैक्षणिक सत्र से 'कृत्रिम मेधा और भविष्य के कौशल' विषय अनिवार्य होंगे। यह निर्णय बदलते दौर की तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार का उद्देश्य दिल्ली के युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार के लिए तैयार करना है, ताकि वे कोडिंग और डेटा एनालिटिक्स में दक्ष बन सकें। इस पाठ्यक्रम को प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालयों के सहयोग से तैयार किया गया है।
प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे की तैयारी इस पहल को लागू करने के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपये के विशेष बजट का आवंटन किया है, जिसका उपयोग कंप्यूटर लैब के आधुनिकीकरण और नए सॉफ्टवेयर लाइसेंस के लिए किया जाएगा। साथ ही, अगले तीन महीनों में राज्य के शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि वे छात्रों को इन विषयों को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों के विशेषज्ञों की देखरेख में संचालित होगा।
छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया शैक्षणिक जगत में इस खबर का स्वागत किया गया है। छात्रों का कहना है कि यह निर्णय उनके करियर की दिशा को नई मजबूती देगा और उन्हें इंडस्ट्री के लिए तैयार करेगा। हालांकि, कुछ शिक्षाविदों ने बुनियादी संसाधनों की कमी पर चिंता जताई है, लेकिन सरकार ने आश्वस्त किया है कि चरणबद्ध तरीके से सभी कॉलेजों को विश्वस्तरीय तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। भविष्य में इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकता है।