भारी बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव और नदी-नालों के उफान पर होने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की चिंताएं बढ़ गई थीं। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य प्रभावित राज्यों के कई जिलाधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाते हुए प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं। जिन इलाकों में रास्ते पूरी तरह से डूब चुके हैं, वहां बसों और वैनों का संचालन भी रोक दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पढ़ाई को सुचारू रखने के विकल्प पर भी कई स्कूल विचार कर रहे हैं।
छात्रों की पढ़ाई का नुकसान और पाठ्यक्रम पूरा करने की चुनौती लगातार छुट्टियों के कारण स्कूली छात्रों की अकादमिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। परीक्षाओं का दौर नजदीक होने के कारण शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों पर ही पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने का भारी दबाव बन गया है। स्कूल प्रशासनों का कहना है कि मौसम सामान्य होते ही अतिरिक्त कक्षाओं का आयोजन करके इस नुकसान की भरपाई की जाएगी। छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन साथ ही उनकी शिक्षा की निरंतरता बनाए रखना भी संस्थानों की प्राथमिकता बनी हुई है। अभिभावकों ने जिला प्रशासन के इस समय पर लिए गए निर्णय की सराहना की है।
बुनियादी ढांचे की स्थिति और स्कूलों की मरम्मत के निर्देश भारी बारिश के कारण कई सरकारी स्कूलों की पुरानी इमारतों में सीलन आने और छत टपकने की शिकायतें भी सामने आई हैं। शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों के भवनों का निरीक्षण करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत मरम्मत कार्य कराएं। बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार का जलभराव न हो और विद्युत वायरिंग पूरी तरह सुरक्षित हो। सरकार स्कूलों के बुनियादी ढांचे को आपदा-रोधी बनाने के लिए एक नई कार्ययोजना तैयार कर रही है।