कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
चुनाव आयोग अधिकारी पर बिना चर्चा फैसले लेने का आरोप: संधू-जोशी ने कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी, कार्रवाई नह...      Bihar MLC Election 2026 Live: जन सुराज के प्रत्याशी आफाक अहमद पर FIR दर्ज, X पर पोस्ट कर शिक्षकों से वोट मांगना पड़ा भारी      गलवान जैसी हिमाकत के लिए अब 100 बार सोचेगा चीन? ड्रोन प्लाटून से बंकर तक; LAC पर भारत की क्या तैयारी?      तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 16 लोगों की मौत, सैकड़ों ज़ख़्मी      गोल्डी ने कहा था- घर गिरा दो, वापस नहीं आऊंगा: लॉरेंस के साथ गैंगस्टर बना, अमेरिका को तलाश; पंजाब में घर खा...      स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...      CJP के सौरव दास-आशुतोष रांका को क्राइम ब्रांच ने बुलाया, नोटिस में क्या लिखा?      Tiger Shroff की चोटों का वीडियो पहली बार आया सामने, फायरिंग के बाद दिखे शरीर पर निशान     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
शिक्षा

शिक्षा व्यवस्था का सच: अमेरिका में भी है भारत जैसा ट्यूशन कल्चर, 12वीं के छात्र ने किया बड़ा खुलासा

भारत की तरह क्या अमेरिका में भी छात्र ट्यूशन और कोचिंग का सहारा लेते हैं? इस सवाल का जवाब अब एक 12वीं कक्षा के छात्र ने दिया है, जिससे पश्चिमी देशों की शिक्षा प्रणाली को लेकर एक नई चर्चा छिड़ गई है।

A
Ankit Yadav
01 सित 2026, 17:45
शिक्षा व्यवस्था का सच: अमेरिका में भी है भारत जैसा ट्यूशन कल्चर, 12वीं के छात्र ने किया बड़ा खुलासा
शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा से यह माना जाता रहा है कि पश्चिमी देशों में छात्र स्कूल की पढ़ाई पर ही पूरी तरह निर्भर रहते हैं और वहां भारत जैसी ट्यूशन संस्कृति देखने को नहीं मिलती है। हालांकि, हाल ही में सामने आए एक खुलासे ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। अमेरिका के एक बारहवीं कक्षा के छात्र ने इस बात से पर्दा उठाया है कि वहां के विद्यार्थी भी अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कक्षाओं और ट्यूशन का खूब सहारा लेते हैं। इस खुलासे के बाद दुनिया भर के शिक्षाविदों के बीच एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई है कि क्या आधुनिक वैश्विक प्रतिस्पर्धा छात्रों को हर देश में एक ही जैसे रास्ते चुनने के लिए मजबूर कर रही है।

पश्चिम में कोचिंग का बढ़ता चलन

पारंपरिक रूप से ऐसा समझा जाता था कि एशियाई देशों, विशेषकर भारत, चीन और दक्षिण कोरिया में अत्यधिक शैक्षणिक दबाव के कारण कोचिंग और ट्यूशन का बाजार फल-फूल रहा है। इन देशों में माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर करियर और प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश दिलाने के लिए बचपन से ही अतिरिक्त ट्यूशन पर मोटी रकम खर्च करते हैं। इसके विपरीत, अमेरिकी शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और तनावमुक्त माना जाता था, जहां सह-पाठयक्रम गतिविधियों और स्व-अध्ययन पर अधिक जोर दिया जाता है। लेकिन बारहवीं के इस छात्र के बयानों ने साबित कर दिया है कि समय के साथ अमेरिका में भी शैक्षणिक माहौल काफी बदल चुका है। वहां भी अब टेस्ट स्कोर सुधारने और उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिला पाने के लिए अतिरिक्त मार्गदर्शन की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस नई परिप्रेक्ष्य से यह स्पष्ट होता है कि अकादमिक दबाव अब किसी एक भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक वैश्विक वास्तविकता बन चुका है। अमेरिका के बड़े शहरों में भी अब विभिन्न प्रकार के ट्यूशन सेंटर और निजी शिक्षक सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। छात्र और उनके अभिभावक इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धी दौर में केवल स्कूली शिक्षा के बूते पर शीर्ष विश्वविद्यालयों में जगह बनाना आसान नहीं रह गया है। यही कारण है कि वहां भी ट्यूशन कल्चर अब मुख्यधारा की शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा बनता जा रहा है, जो भविष्य की सामाजिक और शैक्षिक संरचना पर गहरा प्रभाव डाल रहा है।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज