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विदेश में उच्च शिक्षा: सीबीएसई के मुकाबले स्टेट बोर्ड के छात्र दिखा रहे अधिक रुचि
देशभर में उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में लगातार भारी इजाफा दर्ज किया जा रहा है, जिसमें अब केंद्रीय बोर्ड के साथ-साथ राज्य स्तरीय बोर्डों से जुड़े छात्र भी पीछे नहीं हैं।
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Ankit Yadav
12 सित 2026, 10:50
पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारतीय युवाओं के बीच विदेश के विश्वविद्यालयों में दाखिला पाने का आकर्षण काफी तेजी के साथ बढ़ा है। एक समय ऐसा माना जाता था कि केवल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई या आईसीएसई जैसे प्रमुख बोर्डों से पढ़ाई करने वाले बच्चे ही वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा के अवसर तलाशते हैं, परंतु हालिया रुझानों ने इस पारंपरिक धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित देश के तमाम अन्य राज्यों के स्थानीय स्कूलों यानी स्टेट बोर्ड से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने वाले छात्र भी अब बड़े पैमाने पर विदेशों का रुख करने लगे हैं। वे न सिर्फ ग्लोबल यूनिवर्सिटीज के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, बल्कि स्कॉलरशिप और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारियों में भी पूरी मेहनत के साथ जुट गए हैं।
बदलती मानसिकता और बेहतर अवसरों की तलाश
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण छात्रों और उनके अभिभावकों की बदलती सोच तथा करियर को लेकर बढ़ती महत्वाकांक्षाएं हैं। लखनऊ के कई प्रमुख इलाकों और शिक्षण संस्थानों में इस बात के स्पष्ट संकेत देखने को मिल रहे हैं कि स्टेट बोर्ड के छात्र अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खुद को किसी से कम नहीं आंकते हैं। वे दुनिया भर के प्रतिष्ठित संस्थानों में तकनीकी, प्रबंधन, कला और विज्ञान जैसे विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं। करियर काउंसलर्स का मानना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया की पहुंच ने छोटे शहरों और क्षेत्रीय बोर्डों के छात्रों तक भी वैश्विक शिक्षा की जानकारी बेहद आसान बना दी है, जिसके चलते वे अब विदेश में अपने भविष्य की मजबूत नींव रखने का सपना देखने लगे हैं।
अभिभावकों का समर्थन और बढ़ती चुनौतियां
केवल छात्र ही नहीं बल्कि उनके माता-पिता भी अब अपने बच्चों को बेहतर और उच्च गुणवत्ता वाली वैश्विक शिक्षा दिलाने के लिए वित्तीय और मानसिक रूप से तैयार हो रहे हैं। हालांकि, स्टेट बोर्ड के छात्रों के लिए यह सफर पूरी तरह आसान नहीं होता है। भाषा दक्षता परीक्षाओं जैसे आईलेट्स या टॉफेल के अलावा विदेशी संस्कृति में खुद को ढालना और भारी भरकम ट्यूशन फीस का प्रबंधन करना जैसी कई बड़ी चुनौतियां उनके सामने खड़ी होती हैं। इसके बावजूद, लखनऊ और आसपास के जिलों के युवा इन सभी बाधाओं को पार करते हुए अपनी मेहनत के दम पर विदेश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में जगह बनाने में कामयाब हो रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह रुझान और अधिक तेजी पकड़ेगा, जिससे देश के शैक्षणिक परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।