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विशेष कार्ययोजना जारी: उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के लिए 150 अंकों की अनिवार्य टीईटी परीक्षा की रूपरेखा तैयार
उत्तर प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की अर्हता को लेकर एक नया कदम उठाया है। उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्देशों का पालन करते हुए राज्य में शिक्षकों के वास्ते विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की कार्ययोजना आधिकारिक तौर पर जारी कर दी गई है, जिससे राज्य के शैक्षिक तंत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है।
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Ankit Yadav
03 सित 2026, 16:54
उत्तर प्रदेश के शैक्षिक महकमे से एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है जहाँ प्राधिकारियों ने शिक्षकों के लिए आयोजित होने वाली विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी के संदर्भ में आधिकारिक कार्ययोजना की घोषणा कर दी है। इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में देश की सर्वोच्च अदालत का वह ऐतिहासिक निर्देश है जिसमें शिक्षकों के वास्ते टीईटी को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया था। न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं ताकि तय समयसीमा के भीतर सभी औपचारिकताओं को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इस कदम से राज्य भर के शिक्षण संस्थानों में शिक्षण गुणवत्ता को एक नई ऊंचाई मिलेगी और योग्य अभ्यर्थियों को ही पढ़ाने का अवसर सुनिश्चित हो पाएगा।
परीक्षा का स्वरूप और अंक योजना
आधिकारिक रूप से जारी की गई इस नई कार्ययोजना के तहत आगामी परीक्षा के ढांचे और अंकों के विभाजन को स्पष्ट कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा कुल 150 अंकों की होगी, जिसमें अभ्यर्थियों की शैक्षणिक क्षमता, बाल विकास, शिक्षण शास्त्र और विषयगत ज्ञान का गहन मूल्यांकन किया जाएगा। परीक्षा के प्रश्न पत्र को इस प्रकार से डिजाइन किया जा रहा है कि वह उच्चतम न्यायालय द्वारा तय किए गए मानकों पर पूरी तरह खरा उतरे। इस 150 अंकों की परीक्षा में सफल होने के लिए अभ्यर्थियों को निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त करने होंगे, जिसके बाद ही वे शिक्षक के रूप में अपनी योग्यता साबित करने के पात्र माने जाएंगे। परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए राज्य के शिक्षा बोर्ड ने कई सख्त प्रशासनिक कदम उठाने का भी निर्णय लिया है।
भविष्य की तैयारियों और लागू होने वाली रूपरेखा पर गौर करें तो इस विशेष टीईटी के आयोजन से राज्य के लाखों उन शिक्षकों और भावी शिक्षकों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा जो अपनी शिक्षण पात्रता को प्रमाणित करना चाहते हैं। न्यायालय के इस निर्देश के बाद से ही शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी था, जिसका परिणाम अब इस विस्तृत कार्ययोजना के रूप में सामने आया है। आने वाले दिनों में परीक्षा की तिथियों, आवेदन प्रक्रिया, पाठ्यक्रम और अन्य जरूरी दिशा-निर्देशों के संबंध में विस्तृत अधिसूचना भी जारी किए जाने की संभावना है। राज्य का शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि पूरी चयन और पात्रता प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा न आए, जिससे समय पर परीक्षा का सफल संचालन किया जा सके।