परीक्षा आयोजन का नया प्रशासनिक निर्णय
छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित करने के प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस प्रक्रिया का संचालन छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) द्वारा किया जाएगा। संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) पद्धति पर आधारित होगी, जिससे मूल्यांकन में सटीकता और पारदर्शिता बनी रहे। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस परीक्षा का आयोजन हर वर्ष न्यूनतम दो बार अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। इससे उन शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिलेंगे जो अभी तक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं। परीक्षा एक से अधिक पालियों में आयोजित की जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में 24 सितंबर 2026 को शासन को प्रस्ताव सौंपा था, जिस पर सरकार ने अब मुहर लगा दी है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को सुचारू और त्रुटिहीन बनाना है।
न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन
यह महत्वपूर्ण कदम सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 में पारित आदेशों के बाद उठाया गया है। न्यायालय ने 1 सितंबर 2025 के अपने निर्णय और 29 मई 2026 को पुनर्विचार याचिका पर दिए गए निर्देशों के माध्यम से राज्यों को नई गाइडलाइन जारी की थी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले सभी सेवारत शिक्षकों को, जिनकी नौकरी के पांच वर्ष या उससे अधिक अभी शेष हैं, टीईटी पास करना अनिवार्य है। पदोन्नति पाने या सेवा में बने रहने के लिए इस पात्रता परीक्षा को उत्तीर्ण करना एक आवश्यक योग्यता बना दी गई है। न्यायालय ने राज्यों को यह भी निर्देशित किया था कि शिक्षकों की सुविधा के लिए पात्रता परीक्षा साल में दो बार आयोजित हो। इसी निर्देश के तहत राज्य सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया को निजी तकनीकी सेवा प्रदाता कंपनियों के माध्यम से कराने का निर्णय लिया है। सभी पालियों में प्रश्नपत्रों का कठिनाई स्तर एक जैसा रखा जाएगा ताकि किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।
प्रमाणन और भविष्य की कार्ययोजना
विशेष टीईटी परीक्षा में सफल होने वाले शिक्षकों को औपचारिक प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। यह जिम्मेदारी राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT), रायपुर को सौंपी गई है, जो सभी उत्तीर्ण शिक्षकों के लिए प्रमाणन प्रक्रिया पूरी करेगी। इस नई व्यवस्था का सीधा असर उन हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा जिन्हें अपनी सेवा जारी रखने के लिए पात्रता मानक पूरे करने हैं। सरकार की इस पहल से शिक्षा विभाग में लंबे समय से लंबित इस मुद्दे का समाधान निकलेगा। राज्य शासन ने लोक शिक्षण संचालनालय को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि परीक्षा का आयोजन नियमित रूप से हो। कंप्यूटर आधारित होने के कारण परीक्षा परिणामों में तेजी आने की संभावना है। यह पहल न केवल शिक्षकों के करियर विकास के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि इससे राज्य के शैक्षिक गुणवत्ता मानकों को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में इन परीक्षाओं की तारीखों की घोषणा कर्मचारी चयन मंडल द्वारा अलग से की जाएगी ताकि शिक्षक अपनी तैयारी पूरी कर सकें और परीक्षा के लिए आवेदन कर पाएं।