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युवा बेरोजगारी संकट: नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 15-29 आयुवर्ग के 8.7 करोड़ युवा शिक्षा और रोजगार से पूरी तरह दूर

नीति आयोग द्वारा जारी की गई एक ताजा रिपोर्ट में देश के युवा वर्ग को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर आंकड़ा सामने आया है, जिसके मुताबिक 15 से 29 वर्ष की आयु के बीच के लगभग 8.7 करोड़ युवा ऐसे हैं जो न तो किसी प्रकार की शिक्षा या अध्ययन से जुड़े हैं और न ही उनके पास किसी भी तरह का कोई रोजगार है।

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Ankit Yadav
26 अग 2026, 12:03
युवा बेरोजगारी संकट: नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 15-29 आयुवर्ग के 8.7 करोड़ युवा शिक्षा और रोजगार से पूरी तरह दूर
देश के आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ माने जाने वाले युवा वर्ग को लेकर नीति आयोग की तरफ से एक बहुत ही चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में पंद्रह से उनतीस वर्ष की आयु के बीच आने वाले लगभग सत्तासी मिलियन यानी सतासी करोड़ नहीं बल्कि सत्तासी लाख नहीं बल्कि सतासी लाख युवा इस दायरे में आते हैं। इस विशेष आयु वर्ग के भीतर एक बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा पाया गया है जो वर्तमान में किसी भी शैक्षणिक संस्थान में दाखिला नहीं लिए हुए है और साथ ही उनके पास आजीविका का कोई साधन यानी रोजगार भी उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति देश की जनसांख्यिकीय लाभांश यानी डेमोग्राफिक डिविडेंड की क्षमता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है और नीति निर्माताओं के लिए भी गहरी चिंता का विषय बन गई है।

शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर गहरी चुनौतियां

देश में कौशल विकास योजनाओं और रोजगार सृजन के तमाम दावों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर यह आंकड़े एक अलग ही तस्वीर बयां करते हैं। इस आयु सीमा के युवाओं का एक बड़ा तबका शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हो चुका है और दूसरी तरफ श्रम बाजार में भी अपनी जगह बनाने में असफल साबित हो रहा है। इसके पीछे कई मुख्य कारण हो सकते हैं जैसे औपचारिक शिक्षा की पहुंच का अभाव, व्यावहारिक कौशल की कमी, और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की भारी कमी। जब इतनी बड़ी संख्या में युवा शक्ति बिना किसी उत्पादक कार्य या पठन-पाठन के रहती है, तो यह न केवल पारिवारिक स्तर पर आर्थिक दबाव बढ़ाती है बल्कि देश की कुल आर्थिक वृद्धि दर और सामाजिक स्थिरता पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस समस्या का समय रहते कोई ठोस और दीर्घकालिक समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में यह स्थिति और अधिक विकट हो सकती है। सरकार और संबंधित विभागों को इस बात की समीक्षा करने की आवश्यकता है कि आखिर क्यों युवा वर्ग शिक्षा प्रणाली से बाहर होने के बाद रोजगार पाने में असमर्थ हो रहा है। व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने, उद्योगों की मांग के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करने और युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खोलने की दिशा में युद्ध स्तर पर प्रयास किए जाने की जरूरत है ताकि इस विशाल मानव संसाधन को सही दिशा दी जा सके।
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