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आर्थिक महाशक्ति भारत: जनसांख्यिकी लाभांश के सहारे दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर

भारतीय रिजर्व बैंक के एक पूर्व डिप्टी गवर्नर ने कहा है कि देश अपनी कामकाजी आबादी की ताकत का सही इस्तेमाल करके वैश्विक स्तर पर शीर्ष अर्थव्यवस्था बन सकता है।

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Ankit Yadav
07 सित 2026, 16:54
आर्थिक महाशक्ति भारत: जनसांख्यिकी लाभांश के सहारे दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर देश के जाने-माने वित्तीय विशेषज्ञों ने एक बार फिर बड़ा और सकारात्मक बयान दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक पूर्व डिप्टी गवर्नर ने हाल ही में अपने विचार रखते हुए कहा है कि यदि देश सही समय पर अपनी विशाल युवा आबादी और कार्यबल का समुचित दोहन करे, तो आने वाले समय में भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की पूरी क्षमता रखता है। उनके अनुसार, देश की जनसांख्यिकी लाभांश इस यात्रा का सबसे मुख्य और मजबूत आधार बन सकती है।

जनसांख्यिकी लाभांश का महत्व

देश के विभिन्न हिस्सों में इस विषय पर लगातार चर्चाएं हो रही हैं कि किस प्रकार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत देश के तमाम बड़े और उभरते हुए शहर इस आर्थिक विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्यों में युवाओं की संख्या बहुत अधिक है, जो कार्यबल को एक नई गति प्रदान कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कौशल विकास और रोजगार सृजन पर उचित ध्यान दिया जाए, तो यह युवा शक्ति देश के सकल घरेलू उत्पाद में ऐतिहासिक योगदान दे सकती है। वर्तमान समय में जब दुनिया के कई विकसित देशों की आबादी तेजी से बुजुर्ग हो रही है, तब भारत के पास एक युवा और ऊर्जावान कार्यबल उपलब्ध है। यही कारण है कि वैश्विक मंचों पर भारत को भविष्य के सबसे बड़े बाजारों और उत्पादन केंद्रों में से एक माना जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व अधिकारी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश डिजिटल बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है।

भविष्य की नीतियां और चुनौतियां

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि शिक्षा प्रणाली को व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाया जाए। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में युवाओं को आधुनिक कौशल से लैस करना नीति निर्माताओं की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा, श्रम बाज़ार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना भी इस दिशा में अत्यंत आवश्यक कदम साबित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दशकों तक सही आर्थिक नीतियां और सुधार जारी रहे, तो भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है। लखनऊ जैसे महानगरों में भी स्टार्टअप संस्कृति और व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक वृद्धि को और अधिक मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
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