सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी रिकवरी
शुक्रवार 9 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद स्तर से 438.43 अंकों की छलांग लगाते हुए 72,036.03 के स्तर को स्पर्श किया। बाजार में सकारात्मक रुख के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में 66,563 करोड़ रुपये का इजाफा दर्ज हुआ। इसी तरह निफ्टी इंडेक्स ने भी तेजी का प्रदर्शन करते हुए 151.65 अंकों की बढ़त बनाई और 22,383.45 के उच्च स्तर तक पहुंच गया। गुरुवार को बाजार बंद होने के समय सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मूल्य 4,62,33,248.126 करोड़ रुपये था, जो शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बढ़कर 4,62,99,811.44 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह दिन निवेशकों के लिए काफी राहत भरा रहा क्योंकि बाजार खुलने के कुछ ही समय में तेजी के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे थे।
बाजार के उतार-चढ़ाव और रुपये में मजबूती
गुरुवार 8 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली का दौर देखा गया था। उस दिन सेंसेक्स 1,045.46 अंकों की गिरावट के साथ 71,593.24 के स्तर पर बंद हुआ था, जो पिछले ढाई साल से भी अधिक का निचला स्तर था। कारोबार के दौरान सेंसेक्स में एक समय 1,310.95 अंकों तक की भारी गिरावट देखी गई थी। इसी प्रकार निफ्टी सूचकांक भी 371.25 अंकों की कमजोरी के साथ 22,231.80 के स्तर पर सिमट गया था, जो बीते 21 महीनों का न्यूनतम स्तर रहा। हालांकि शुक्रवार को स्थिति में सुधार आया और भारतीय मुद्रा रुपये में भी मजबूती दर्ज की गई। रुपया शुरुआती कारोबार में 23 पैसे चढ़कर 96.65 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। एक दिन पहले रुपया 96.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। बाजार के जानकारों के अनुसार इस दौरान टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस, जेएसडब्ल्यू स्टील और एनसीसी जैसे शेयरों में उठापटक जारी रहने की उम्मीद है।
गिरावट के कारण और निवेश संबंधी सलाह
हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार पर भारी दबाव बना हुआ था, जिसके पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार रहे हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती ने घरेलू अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया, जिससे बाजार की धारणा पर असर पड़ा। मौद्रिक नीति के कड़े होने और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि बाजार में निवेश करना जोखिमों से भरा होता है। किसी भी तरह का आर्थिक निर्णय लेने से पहले निवेशकों को हमेशा विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए। यहां दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बाजार के उतार-चढ़ाव पूरी तरह से व्यापक आर्थिक संकेतकों और नीतिगत बदलावों पर निर्भर करते हैं।