चार दिनों में भारी आर्थिक नुकसान
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में पिछले चार कारोबारी सत्रों के दौरान निवेशकों की पूंजी में बहुत बड़ी कमी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस छोटी सी अवधि में निवेशकों की कुल संपत्ति से चौदह लाख करोड़ रुपये पूरी तरह स्वाहा हो चुके हैं। बाजार में मचे इस भयंकर कोहराम के कारण देश भर के खुदरा निवेशकों से लेकर बड़े संस्थागत निवेशकों तक में गहरी चिंता का माहौल बन गया है। इस भारी भरकम गिरावट का सीधा असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ा है और उनकी गाढ़ी कमाई पल भर में डूब गई है। बाजार विश्लेषक इस घटनाक्रम को हाल के दिनों का एक बहुत बड़ा आर्थिक झटका मान रहे हैं जिससे शेयर बाजार की सेहत पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली का जो दौर शुरू हुआ था उसने देखते ही देखते पूरे बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। निवेशकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उनके शेयर लगातार सस्ते होते चले गए जिससे उनका कुल मूल्यांकन तेजी से नीचे गिरता गया। इस स्थिति ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक या घरेलू कारक किस तरह से चंद दिनों में बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल सकते हैं।
सेंसेक्स में 2700 अंकों की गिरावट
इस कारोबारी उथल-पुथल के दौरान प्रमुख शेयर सूचकांक सेंसेक्स में सत्ताईस सौ अंकों से भी अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार खुलने के बाद से ही लगातार बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि सेंसेक्स संभलने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। सत्र के दौरान बिकवाल इतने हावी रहे कि उन्होंने चुनिंदा शेयरों के साथ साथ लगभग सभी बड़े और छोटे शेयरों को जमकर बेचा। इस भारी दबाव के कारण सेंसेक्स के प्रमुख शेयर धड़ाम हो गए और सूचकांक निचले स्तर पर जा पहुंचा। बाजार के जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में अंकों का टूटना किसी सामान्य कारोबार का हिस्सा नहीं बल्कि एक बड़े संकट का संकेत है। कारोबार के दौरान जब बिकवाली का यह तूफान आया तब छोटे निवेशकों में भारी भगदड़ मच गई और उन्होंने अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए। इससे सूचकांक पर और अधिक दबाव बढ़ गया तथा वह लगातार नीचे की ओर लुढ़कता चला गया। इस मंदी के दौर में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स के शेयरों में लाल निशान देखने को मिला और किसी भी क्षेत्र को इससे राहत नहीं मिल सकी। इस प्रकार की तेज गिरावट ने बाजार की चाल पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है और हर कोई इसके कारणों की गहराई से समीक्षा करने में जुट गया है।
बाजार में गिरावट की पृष्ठभूमि और महत्व
शेयर बाजार में इस तरह की अचानक और बड़ी गिरावट के पीछे कई तरह की आर्थिक स्थितियां और वैश्विक कारण जिम्मेदार माने जाते हैं। सामान्य तौर पर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल होती है या घरेलू अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक अपनी पूंजी सुरक्षित करने के लिए बिकवाली का रास्ता चुनते हैं। इस प्रकार की बिकवाली से बाजार का सेंटिमेंट खराब हो जाता है और सूचकांक तेजी से नीचे गिरने लगते हैं। शेयर बाजार में निवेश करने वाले आम नागरिकों को हमेशा यह सलाह दी जाती है कि वे बाजार के उतार-चढ़ाव को समझकर ही कोई भी बड़ा कदम उठाएं। इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि शेयर बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है और किसी भी समय बड़ा नुकसान हो सकता है। सरकार और नियामक संस्थाएं भी ऐसे हालातों पर कड़ी नजर रखती हैं ताकि बाजार की पारदर्शिता बनी रहे और निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके। भविष्य में इस प्रकार के झटकों से बचने के लिए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता रखनी चाहिए और केवल मजबूत बुनियादी आधार वाले शेयरों में ही निवेश करना समझदारी माना जाता है।