प्रमुख सूचकांकों में भारी कमजोरी
कारोबार समाप्त होने पर बंबई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 571.59 अंक या 0.79 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 71,909.70 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक भी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत फिसलकर 22,421.95 के स्तर पर आ गया। इस बड़ी गिरावट का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया और मझोले तथा छोटे शेयरों वाले यानी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी लगभग एक प्रतिशत नीचे लुढ़क गए। अधिकांश सेक्टर के सूचकांक लाल निशान के दायरे में बंद हुए जिससे बाजार के हर कोने में बिकवाली का दबाव साफ तौर पर झलकता रहा। हालांकि इस आम गिरावट के विपरीत आईटी क्षेत्र के शेयरों ने अपनी ताकत दिखाई और निफ्टी आईटी सूचकांक में 2.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा धातु, ऑटो, मीडिया और टिकाऊ उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने जमकर बिकवाली की जिससे बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह से कमजोर बना रहा।
कंपनियों के बाजार पूंजीकरण को तगड़ा झटका
बाजार में मचे हाहाकार का सीधा और भारी असर देश की सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्यांकन पर पड़ा है। पिछले कारोबारी दिन यानी 30 सितंबर को बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,71,86,380.74 करोड़ रुपये था जो एक अक्टूबर को घटकर 4,66,89,359.47 करोड़ रुपये पर सिमट गया। केवल एक ही कारोबारी सत्र के भीतर निवेशकों की पूंजी से करीब 4.97 लाख करोड़ रुपये कम हो गए। व्यक्तिगत शेयरों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो मारुति सुजुकी का शेयर सबसे अधिक 5.01 प्रतिशत गिर गया। टाटा स्टील के शेयरों में 3.33 प्रतिशत की गिरावट आई और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर भी 3.17 प्रतिशत नीचे बंद हुए। इसके अलावा आईटीसी और अदानी पोर्ट्स के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। दूसरी तरफ इंफोसिस का शेयर 3.37 प्रतिशत की तेजी के साथ सेंसेक्स का सबसे बड़ा लाभ कमाने वाला शेयर बना। इसके अलावा एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टीसीएस के शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए लेकिन यह तेजी पूरे बाजार के नुकसान की भरपाई करने के लिए नाकाफी साबित हुई।
विदेशी बिकवाली और वैश्विक दबाव के कारण
घरेलू शेयर बाजार में चल रही इस उथल-पुथल के पीछे विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। विदेशी निवेशक लगातार चार सत्रों से भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं और इन चार दिनों में उन्होंने करीब 29 हजार करोड़ रुपये की बिकवाली की है। सितंबर के पूरे महीने में विदेशी निवेशकों की शुद्ध नकद बिकवाली लगभग 44 हजार करोड़ रुपये रही है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका के डाउ फ्यूचर्स में भी कमजोरी देखी गई और रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब आ गया। बाजार की घबराहट को मापने वाला पैमाना इंडिया विक्स भी 12 प्रतिशत से अधिक उछलकर 16 के आंकड़े को पार कर गया। इन तमाम नकारात्मक वैश्विक संकेतों और विदेशी पूंजी निकासी के चलते बाजार में लगातार चिंता का माहौल बना हुआ है जिससे निवेशकों की मुश्किलें आने वाले दिनों में भी बढ़ सकती हैं।