मंगलवार को बाजार खुलते ही बड़ी गिरावट
सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर और निराशाजनक स्थिति के साथ हुई। पिछले दिन की भारी बिकवाली के बाद मंगलवार को भी बंबई स्टॉक एक्सचेंज के तीस शेयरों वाले प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स ने लाल निशान में अपना कारोबार आरंभ किया। बाजार खुलते ही दोनों प्रमुख सूचकांकों के नीचे गिरने की रफ्तार बहुत तेज होती चली गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सेंसेक्स देखते ही देखते छह सौ अंकों से ज्यादा का बड़ा गोता लगा गया। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक भी भारी कमजोरी के साथ फिसलते हुए बाईस हजार छह सौ के स्तर पर कारोबार करता हुआ साफ दिखाई दिया। इस शुरुआती कारोबार के दौरान देश के तमाम बड़े घरानों और दिग्गज कंपनियों के शेयर बुरी तरह से बिखरे हुए नजर आए। निवेशकों में इस अचानक आई कमजोरी को लेकर चिंता साफ तौर पर बढ़ती जा रही थी। बाजार के विशेषज्ञों और कारोबारियों के अनुसार यह स्थिति सुबह के सत्र में ही काफी विकट हो गई थी। सिर्फ पांच मिनट के भीतर ही सेंसेक्स छह सौ अंक से अधिक फिसलकर बेहतरहत्तर हजार एक सौ छत्तीस के निचले स्तर पर आ गया। निफ्टी का पचास शेयरों वाला पैमाना भी अपने पिछले बंद स्तर से नीचे खिसक गया और भारी गिरावट का शिकार हो गया।
दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली का दबाव
कारोबार के दौरान देश की प्रमुख कंपनियों और दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली का दौर लगातार जारी रहा। शेयर बाजार में आई इस मंदी के बीच सबसे अधिक नुकसान उठाने वाले चुनिंदा शेयरों में कई नाम शामिल रहे। बजाज फाइनेंस का शेयर दो दशमलव दस प्रतिशत की कमजोरी के साथ कारोबार करता हुआ दिखाई दिया। इसके अलावा एचडीएफसी बैंक का शेयर एक दशमलव सत्तर प्रतिशत और कोटक बैंक का शेयर एक दशमलव पचास प्रतिशत तक नीचे लुढ़क गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर भी एक दशमलव तीस प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था जबकि इंफोसिस के शेयर में एक दशमलव चालीस प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। मिडकैप सेगमेंट की बात करें तो पॉलिसी बाजार का शेयर चार प्रतिशत तक टूट गया और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का शेयर भी दो दशमलव पंद्रह प्रतिशत फिसल गया। इन सभी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में आई भारी बिकवाली के कारण पूरे बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह से बिगड़ गया था। निवेशकों को समझ नहीं आ रहा था कि वे अपनी पूंजी को बचाने के लिए क्या कदम उठाएं क्योंकि हर तरफ से बिकवाली के ही समाचार सामने आ रहे थे। बाजार विश्लेषकों का यह सुझाव रहा है कि ऐसे किसी भी उतार-चढ़ाव भरे माहौल में निवेश करने से पहले हमेशा अपने वित्तीय विशेषज्ञों की राय अवश्य लेनी चाहिए ताकि जोखिम को कम किया जा सके।
सोमवार के बड़े क्रैश और विदेशी बाजारों का असर
शेयर बाजार में मंगलवार को आई इस ताजा गिरावट के पीछे विदेशी बाजारों से मिल रहे बेहद खराब संकेत मुख्य वजह रहे। इससे पहले बीते कारोबारी दिन सोमवार को भी भारतीय शेयर बाजार में एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ा क्रैश देखने को मिला था। उस दिन कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स ग्यारह सौ चौबीस अंक की भारी गिरावट के साथ बेहतरहत्तर हजार सात सौ इकहत्तर पर बंद हुआ था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी दो सौ साठ अंकों का गोता लगाकर बाईस हजार सात सौ अस्सी के स्तर पर सिमट गया था। सोमवार के उस भीषण क्रैश के कारण देश भर के निवेशकों के आठ दशमलव इक्कासी लाख करोड़ रुपये पूरी तरह से स्वाहा हो गए थे। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले शुक्रवार के चार करोड़ अड़समी लाख करोड़ से घटकर सोमवार की शाम तक चार करोड़ चौहत्तर लाख करोड़ रुपये रह गया था। विदेशी बाजारों की बात करें तो अमेरिकी शेयर बाजार में भारी भगदड़ मची थी जहां डाउ जोंस तीन सौ सैंतालीस अंक और नैस्डैक दो सौ अड़तालीस अंक लुढ़क गया था। इसके अलावा एशियाई बाजारों में भी मंगलवार को भारी क्रैश दिखाई दिया जहां जापान का निक्केई करीब आठ सौ अंक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक करीब दो सौ अंक फिसलकर कारोबार कर रहा था।