गाजीपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का वर्तमान हाल
गाजीपुर जिले के भीतर हाल ही में चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में कुल 3767 मरीजों का इलाज किया गया है। यह संख्या उन लोगों की है जिन्हें स्थानीय स्तर पर चिकित्सीय सहायता मुहैया कराई गई है। जिले के भीतर डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों ने अपनी सेवाओं के माध्यम से इन रोगियों को देखने का काम किया है। मरीजों की यह बड़ी संख्या इस बात को दर्शाती है कि नियमित और सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए लोग नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों का रुख कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सामान्य रोगियों को दवाइयां और जरूरी परामर्श दिए गए हैं। सामान्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय अस्पताल अपनी क्षमता के अनुसार लगातार काम कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक पहुंच बनाई जा सके। जिले के विभिन्न हिस्सों से आने वाले आम मरीज इन चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं और अपनी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का समाधान पा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चिकित्सा का यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के नियमित कामकाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है जो हर रोज दर्ज किया जाता है और इसके आधार पर आगे की व्यवस्थाओं की रूपरेखा तय की जाती है।
गंभीर बीमारियों के लिए वाराणसी की मजबूरी
गाजीपुर में बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज होने के बावजूद एक गंभीर चुनौती अब भी बनी हुई है। जिन रोगियों को मस्तिष्क यानी ब्रेन सर्जरी या फिर हृदय यानी हार्ट सर्जरी की आवश्यकता होती है, वे स्थानीय स्तर पर पूरी तरह से लाचार नजर आते हैं। इन विशेष और गंभीर चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के लिए जिले में अभी भी पर्याप्त और उन्नत साधन उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि ब्रेन और हार्ट सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रियाओं के लिए मरीजों को मजबूरन वाराणसी की दौड़ लगानी पड़ती है। वाराणसी के बड़े और उन्नत अस्पतालों में ही इन गंभीर ऑपरेशनों को सफलताaपूर्वक करने की सुविधाएं मौजूद हैं। गाजीपुर के स्थानीय अस्पतालों से डॉक्टरों द्वारा ऐसे मामलों में मरीजों को सीधे वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। इस स्थिति के कारण मरीजों और उनके परिजनों को अचानक से बड़े शहर की यात्रा करनी पड़ती है जिसमें न केवल अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है बल्कि समय पर इलाज मिलने में भी कई प्रकार की बाधाएं उत्पन्न हो जाती हैं। सड़क मार्ग से वाराणसी पहुंचने की यह लंबी दूरी गंभीर हालत वाले मरीजों के लिए और अधिक कष्टदायक साबित होती है क्योंकि रास्ते में उनकी स्थिति बिगड़ने का भी लगातार जोखिम बना रहता है।
स्वास्थ्य ढांचे की कमी और आगे की जरूरतें
गाजीपुर की इस मौजूदा चिकित्सा स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं तो काम कर रही हैं। हालांकि सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का दायरा अभी भी बहुत सीमित है। सामान्य बीमारियों और मौसमी तकलीफों के लिए 3767 मरीजों का इलाज होना एक सकारात्मक बात जरूर है। मगर जब तक जिला स्तर पर ही हृदय रोग और मस्तिष्क संबंधी गंभीर शल्य चिकित्सा यानी सर्जरी की आधुनिक इकाइयां स्थापित नहीं की जाती हैं, तब तक मरीजों की यह परेशानी खत्म नहीं हो सकती है। सामान्य नागरिकों को छोटी-छोटी और गंभीर दोनों प्रकार की चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए अब भी पूरी तरह से आत्मनिर्भर स्वास्थ्य ढांचे का इंतजार है। स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों की ओर से लगातार यह अपेक्षा की जाती है कि भविष्य में गाजीपुर के अस्पतालों का दायरा बढ़ाया जाए। यदि जिला स्तर पर ही उन्नत मेडिकल उपकरण और विशेषज्ञ सर्जन उपलब्ध करा दिए जाएं तो मरीजों को वाराणसी जैसे पड़ोसी शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इस तरह की व्यवस्था बनने से आम जनता का समय और पैसा दोनों बचेगा तथा आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जान बचाने की संभावना भी काफी हद तक बढ़ जाएगी।