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स्वास्थ्य

गंभीर लापरवाही: कलेक्टर के औचक निरीक्षण में खुली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल, सीएचओ नहीं माप सकी महिला मरीज का रक्तचाप

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारी की सख्ती से स्वास्थ्य केंद्र की बड़ी खामियां उजागर हो गईं।

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Ankit Yadav
31 अग 2026, 15:07
गंभीर लापरवाही: कलेक्टर के औचक निरीक्षण में खुली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल, सीएचओ नहीं माप सकी महिला मरीज का रक्तचाप
राज्य के एक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण करते समय प्रशासनिक अमले और जिला कलेक्टर के सामने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली खुलकर सामने आ गई। निरीक्षण के दौरान एक कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर यानी सीएचओ की बुनियादी चिकित्सीय कार्यों में असमर्थता देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। मौके पर मौजूद एक महिला मरीज का रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर मापने में सीएचओ पूरी तरह असफल साबित हुईं, जिससे स्वास्थ्य कर्मियों की कार्यप्रणाली और उनकी पेशेवर योग्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना ने ग्रामीण और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छेड़ दी है।

बुनियादी कौशल पर उठे गंभीर सवाल

स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात चिकित्सा कर्मियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे मरीजों की प्रारंभिक जांच और बुनियादी प्रक्रियाएं पूरी दक्षता के साथ पूरी करें। हालांकि, इस हालिया मामले ने यह साबित कर दिया है कि कई बार कागजों पर प्रशिक्षित नजर आने वाले कर्मी जमीनी स्तर पर कितनी बड़ी चूक कर बैठते हैं। जब एक जिम्मेदार पद पर आसीन सीएचओ सामान्य सी प्रक्रिया यानी मरीज का ब्लड प्रेशर तक दर्ज नहीं कर पाई, तो वहां आने वाले आम नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही मरीजों की जान के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है। प्रशासनिक स्तर पर इस तरह के औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यही सुनिश्चित करना होता है कि आम जनता तक बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँच सकें। लेकिन जब जमीनी हालात ऐसे मिलते हैं, तो प्रशासन को मजबूरन सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। इस घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों के बीच भी हलचल मच गई है। संबंधित स्वास्थ्य केंद्र की कार्यशैली की समीक्षा की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ऐसी नियुक्तियों और प्रशिक्षण में कहाँ कमियां रह गई हैं। संबंधित अधिकारियों द्वारा इस मामले में कड़ी कार्रवाई किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। ऐसे मामलों से न केवल महकमे में हड़कंप मचता है, बल्कि अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को भी एक सख्त संदेश मिलता है कि वे अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह सतर्क रहें। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग इस प्रकार की व्यवस्थाओं की सुध लेने के लिए और अधिक औचक निरीक्षण अभियान चला सकता है, जिससे मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाया जा सके।
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