एकमुश्त भुगतान करने वालों को प्राथमिकता और नई योजना का खाका लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा शुरू की गई इस विशेष स्कीम के अंतर्गत प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और सुगम बनाया गया है ताकि संपत्ति खरीदने के इच्छुक आम लोगों को किसी प्रकार की अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। प्राधिकरण के अधिकारियों ने इस बात की स्पष्ट रूप से जानकारी दी है कि जो भी आवेदक अपने भूखंड की पूरी कीमत का भुगतान एक बार में ही जमा करने की क्षमता रखते हैं और उस विकल्प को चुनते हैं, उन्हें लॉटरी या अन्य सामान्य प्रतीक्षा सूचियों के झंझट में पड़े बिना सबसे पहले प्लॉट का आवंटन किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य प्राधिकरण के पास वित्तीय संसाधनों का सुचारू प्रवाह बनाए रखना और उन गंभीर खरीदारों को त्वरित लाभ पहुंचाना है जो किश्तों के लंबे चक्र में फंसना नहीं चाहते हैं। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद से ही संपत्ति बाजार में हलचल तेज हो गई है और तमाम ऐसे लोग जो अपने सपनों का आशियाना जल्द से जल्द तैयार करना चाहते हैं, वे इस स्कीम के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाने में जुट गए हैं। प्राधिकरण के संबंधित विभाग ने इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं ताकि बिना किसी तकनीकी बाधा के भूखंडों का वितरण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
आवासीय योजनाओं की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन का महत्व भारतीय शहरी विकास निकायों और आवास प्राधिकरणों के इतिहास में इस प्रकार की नीतियां लंबे समय से वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का एक प्रमुख माध्यम रही हैं जब भी कोई बड़ा सरकारी संस्थान नई ज़मीन विकसित करता है या नई कॉलोनियों का निर्माण करता है, तो उसके सामने आधारभूत संरचनाओं को खड़ा करने के लिए भारी मात्रा में पूंजी की आवश्यकता होती है। ऐसी परिस्थितियों में एकमुश्त भुगतान के आधार पर भूखंडों का आवंटन करने वाली योजनाएं अधिकारियों के लिए बेहद मददगार साबित होती हैं क्योंकि इससे निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए तुरंत पर्याप्त धन मिल जाता है और बैंक ऋणों पर निर्भरता कम हो जाती है। इस प्रकार की व्यवस्थाओं से न केवल प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है बल्कि रुकी हुई परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने में भी बहुत बड़ी मदद मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के प्रमुख शहरी केंद्रों में जहां आवासीय भूखंडों की मांग हमेशा आसमान छूती रहती है, वहां इस तरह की अग्रिम भुगतान वाली योजनाएं गंभीर और वास्तविक खरीदारों को बिचौलियों से बचाकर सीधे तौर पर पारदर्शी लाभ दिलाने का एक बेहतरीन ज़रिया बनती हैं। हालांकि, इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि किश्तों पर घर लेने वाले मध्यम वर्गीय और सामान्य नागरिकों के हितों की भी पूरी रक्षा की जाए और उनके लिए भी अलग से उचित श्रेणियां निर्धारित की जाएं ताकि समाज के हर वर्ग के व्यक्ति को अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार संपत्ति खरीदने का सुअवसर मिल सके।
खरीदारों पर असर और भविष्य की संभावनाओं का आकलन इस ताज़ा फैसले के बाद लखनऊ क्षेत्र के रियल एस्टेट बाज़ार में एक सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है और उन निवेशकों तथा आम नागरिकों में भारी उत्साह है जो लंबे समय से सुरक्षित और प्राधिकृत ज़मीन पर निवेश करने के अवसर तलाश रहे थे। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि इस प्रकार की योजनाओं से आने वाले दिनों में न केवल सरकारी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी बल्कि अनधिकृत कॉलोनियों के विकास पर भी प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी क्योंकि लोग कानूनी रूप से सुरक्षित और सभी स्वीकृतियों से युक्त प्राधिकरण के भूखंडों को प्राथमिकता देंगे। जो लोग एकमुश्त भुगतान करके तुरंत अपने प्लॉट का कब्जा प्राप्त कर लेंगे, वे भविष्य में अपने मकान के निर्माण कार्य को भी बिना किसी देरी के शुरू कर सकेंगे जिससे शहर के नए विस्तारित क्षेत्रों में बसाहट तेजी से बढ़ेगी। इसके अलावा, इस पूरी नीति से यह भी संदेश जाता है कि स्थानीय विकास निकाय अब अपनी कार्यशैली को अधिक उपभोक्ता-अनुकूल और गतिशील बना रहे हैं ताकि आधुनिक समय की जरूरतों के मुताबिक शहरी नियोजन को गति दी जा सके। आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे इस स्कीम के तहत भूखंडों के पंजीकरण और आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे यह स्पष्ट होता जाएगा कि जनता की तरफ से इसे कितना व्यापक समर्थन मिल रहा है और यह शहरी विकास के क्षेत्र में कितना मील का पत्थर साबित होता है।