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बड़ा प्रतिबंध: दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में दो महीने खेलकूद गतिविधियों पर रहेगी रोक, सीएक्यूएम के सख्त निर्देश
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने एक कड़ा निर्णय लिया है जिसके तहत स्कूलों में आगामी दो महीनों तक खेल गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी गई है।
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Ankit Yadav
16 सित 2026, 13:06
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के सभी स्कूलों में खेलकूद गतिविधियों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त आदेश सामने आया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी सीएक्यूएम ने निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में अगले दो महीनों तक किसी भी प्रकार की बाहरी खेल गतिविधियों या स्पोर्ट्स इवेंट्स का आयोजन नहीं किया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को जहरीली हवा और बढ़ते प्रदूषण के संभावित दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखना है, क्योंकि लगातार खराब होती हवा का सबसे बुरा असर छोटे बच्चों और स्कूली छात्रों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता
दिल्ली-एनसीआर में बदलते मौसम और पर्यावरणीय परिस्थितियों के मद्देनजर प्रशासन लगातार एहतियाती कदम उठा रहा है। इस कड़ी में स्कूल स्तर पर होने वाली खेल प्रतियोगिताओं, पीटी पीरियड और खुले मैदान में खेले जाने वाले खेलों पर पाबंदी लगाना एक जरूरी कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से बच्चों में सांस की बीमारियां, अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए, बच्चों की सेहत से खिलवाड़ न हो, इसके लिए यह दो महीने का प्रतिबंध लगाया गया है ताकि वे बाहरी गतिविधियों की बजाय इनडोर गतिविधियों तक सीमित रहें।
इस नए निर्देश के बाद से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर क्षेत्र के स्कूलों को अपने स्पोर्ट्स कैलेंडर में बदलाव करने होंगे। खेल शिक्षकों और स्कूल प्रशासनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस अवधि के दौरान कोई भी बड़ा आउटडोर टूर्नामेंट या खेल अभ्यास खुले मैदान में न हो। हालांकि, इस पाबंदी से बच्चों की शारीरिक फिटनेस पर असर पड़ सकता है, जिसके विकल्प के रूप में स्कूल इनडोर गेम्स जैसे कि शतरंज, कैरम, टेबल टेनिस या योग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विचार कर रहे हैं, ताकि बच्चों की शारीरिक और मानसिक सक्रियता बनी रहे।
अभिभावकों और स्कूलों की प्रतिक्रिया
सीएक्यूएम के इस निर्देश पर अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। अधिकांश अभिभावक बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहते हैं और इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि प्रदूषण के इस दौर में बच्चों को सुरक्षित रखना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी है। दूसरी ओर, कुछ स्कूल प्रशासनों का यह भी कहना है कि इस पाबंदी से उनके सालभर के स्पोर्ट्स प्लान और आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी पर असर जरूर पड़ेगा, लेकिन वे आयोग के इन नियमों का पूरी तरह से पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन द्वारा इन नियमों के कड़ाई से अनुपालन के लिए औचक निरीक्षण भी किए जा सकते हैं।
स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि सभी निजी और सरकारी स्कूल इस आदेश का अक्षरशः पालन करें। यदि किसी स्कूल द्वारा इन निर्देशों की अनदेखी की जाती है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है। कुल मिलाकर, दिल्ली-एनसीआर में बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह दो महीने का खेल प्रतिबंध एक कड़ा और समय की मांग के अनुसार उठाया गया कदम है, जिसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को गंभीर स्वास्थ्य संकटों से बचाना है।