दिल्ली में स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ़्तारी की मांग कर रहे सीजेपी नेताओं का प्रदर्शन, अब तक क्या पता है?
देवीघाट से ग्राउंड रिपोर्ट, जहां सब तबाह हो गया
अखिलेश यादव के समर्थन से UP चुनाव लड़ेगी CJP? पार्टी ने बता दिया प्लान
कल का मौसम 5 सितंबर: 12 घंटे के भीतर 23 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, 75 की स्पीड से हवा; IMD का अपडेट
पाकिस्तानी सेना पर मौत बनकर टूटे BLA लड़ाके, बलूचिस्तान में भीषण हमले, मुनीर के 25 जवानों की मौत
निशांत कुमार को माला पहनाते ही बड़ा कांड! JDU नेता के गले से 7 लाख की चेन ले उड़े चोर
जम्मू-कश्मीर के बडगाम में एक आतंकी ढेर, सुरक्षाबलों ने जंगल को चारों तरफ से घेरा; दूसरे की तलाश जारी
नशे में था फुकेट-दिल्ली फ्लाइट का पायलट, फिर भी रद्द नहीं होगा लाइसेंस! नियम क्या कहते हैं?
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
बड़ा संकट: आठ सौ करोड़ के जेपीएनआईसी में छह हजार कुर्सियां गायब और कबाड़खाना बना परिसर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है, जहां करोड़ों की लागत से तैयार किए गए जेपीएनआईसी की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है और वहां से हजारों कुर्सियां गायब मिली हैं।
A
Ankit Yadav
04 सित 2026, 17:25
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र यानी जेपीएनआईसी की मौजूदा स्थिति ने सबको हैरान कर दिया है। कभी भव्यता और आधुनिक सुविधाओं के लिए चर्चा में रहने वाला यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब प्रशासनिक लापरवाही और देखरेख के अभाव में किसी वीरान कबाड़खाने में तब्दील होता नजर आ रहा है। लंबे समय से बंद पड़े इस परिसर के ताले जब निर्धारित तीस साल की लीज अवधि पूरी होने से पहले ही अचानक खोले गए, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी सन्न रह गए। प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि परिसर के भीतर रखी लगभग छह हजार कुर्सियां पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं, जिनका कोई अतापता नहीं मिल पा रहा है।
लाखों-करोड़ों की संपत्ति और बुनियादी ढांचे की बर्बादी
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस विशाल परियोजना को बनाने में करीब आठ सौ करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च किया गया था, जिसका उद्देश्य शहर में एक विश्वस्तरीय कन्वेंशन और सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करना था। हालांकि, राजनीतिक खींचतान, प्रशासनिक सुस्ती और कानूनी अड़चनों के कारण यह इमारत पिछले कई वर्षों से लगभग लावारिस हालत में पड़ी हुई थी। समय बीतने के साथ ही इस बहुमूल्य सरकारी संपत्ति का रखरखाव पूरी तरह बंद हो गया, जिसके परिणामस्वरूप असामाजिक तत्वों ने यहां डेरा डालना शुरू कर दिया और बेशकीमती सामानों की चोरी की घटनाएं बेरोकटोक होने लगीं।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे सवाल
परिसर के ताले खुलने के बाद जिस तरह से कुर्सियों और अन्य महत्वपूर्ण सामानों के गायब होने की पुष्टि हुई है, उससे सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा दाग लग गया है। जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सामानों का रातोंरात गायब हो जाना बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं हो सकता है। जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से बने इस सार्वजनिक ढांचे की ऐसी दुर्गति देखकर शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और विपक्षी दलों में भी गहरा आक्रोश व्याप्त है। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब यह संपत्ति सरकार के अधीन थी और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आधिकारिक तौर पर तय थी, तो इतनी बड़ी तादाद में फर्नीचर और अन्य सामान कैसे गायब हो गया।
आगे की कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस गंभीर घटनाक्रम के तूल पकड़ने के बाद अब प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले की लीपापोती में जुट गए हैं। ऐसी चर्चाएं जोरों पर हैं कि इस बड़े पैमाने पर हुई चोरी और अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के वास्ते जल्द ही एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया जा सकता है। इसके अलावा, इस बहुचर्चित भवन को दोबारा से पटरी पर लाने और इसकी उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से योजनाएं बनाई जा रही हैं, ताकि जनता के अरबों रुपयों की और अधिक बर्बादी को रोका जा सके और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।