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उत्तराखंड में तबाही: नैनीताल में 217 मिमी बारिश, अलकनंदा-गंगा खतरे के निशान पर और 152 सड़कें बंद

उत्तराखंड में मानसूनी बारिश का कहर लगातार जारी है। नैनीताल जिले में भारी बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है, जबकि कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 15:05
उत्तराखंड में तबाही: नैनीताल में 217 मिमी बारिश, अलकनंदा-गंगा खतरे के निशान पर और 152 सड़कें बंद
पहाड़ी राज्यों में मौसम की बेरुखी थमने का नाम नहीं ले रही है और विशेष रूप से उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में जलप्रलय जैसे हालात बन गए हैं। पिछले कुछ घंटों के दौरान बादलों के आक्रामक रुख के चलते कई इलाकों में भारी तबाही देखने को मिली है। इस प्राकृतिक आपदा ने आम नागरिकों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं और प्रशासन की तरफ से लगातार एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। लगातार हो रही मूसलाधार मानसूनी बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है और लोग अपने घरों में ही रहने को मजबूर हैं।

नदियों का बढ़ता जलस्तर और यातायात व्यवस्था

राजकीय आंकड़ों के अनुसार, नैनीताल क्षेत्र में रिकॉर्ड 217 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी भागों तक जलप्रलय जैसे दृश्य दिखाई दे रहे हैं। राज्य की प्रमुख जलधाराएं जैसे अलकनंदा और पवित्र गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच चुका है, जिसके कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों की धड़कनें तेज हो गईं हैं। स्थानीय प्रशासन ने नदी के आसपास के इलाकों में रेड अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी है ताकि जलस्तर में अचानक होने वाले किसी भी खतरनाक उछाल से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, भूस्खलन और पहाड़ों से मलबा गिरने की घटनाओं के कारण परिवहन व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। राज्य भर में लगभग 152 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो चुकी है, जिनमें कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग भी शामिल हैं। सड़कों के बंद होने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और राहत कार्यों में भारी बाधा आ रही है। सड़क निर्माण और आपदा प्रबंधन विभाग के बुलडोजर तथा अन्य भारी मशीनें मलबे को हटाने के कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन लगातार गिरते पत्थरों के कारण ऑपरेशन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग की ओर से जारी चेतावनियों के मद्देनजर राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहे हैं। मुख्य मार्गों को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि चार धाम यात्रा और स्थानीय आवागमन पर पड़ा असर कम किया जा सके। राहत शिविरों को भी अलर्ट मोड पर रख दिया गया है और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश जारी किए गए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें जब तक कि मौसम पूरी तरह से सामान्य नहीं हो जाता।
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