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पांढुर्णा में गोटमार मेला: आगामी 11 सितंबर को जाम नदी के तट पर होगा पत्थरों का पारंपरिक खेल

मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में हर साल आयोजित होने वाला विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला इस बार आगामी 11 सितंबर को मनाया जाएगा। इस अनूठी और रोमांचक परंपरा को देखने के लिए देश-विदेश से लोग यहां पहुंचते हैं, जहां जाम नदी के दोनों किनारों से दो पक्षों के बीच पत्थरों की बौछार होती है।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 16:44
पांढुर्णा में गोटमार मेला: आगामी 11 सितंबर को जाम नदी के तट पर होगा पत्थरों का पारंपरिक खेल
मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक मानचित्र पर अपनी एक विशेष और अनूठी पहचान रखने वाला विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला इस वर्ष आगामी 11 सितंबर को पांढुर्णा में आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर स्थानीय प्रशासन और क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा तैयारियां तेजी से शुरू कर दी गई हैं। हर साल भाद्रपद मास के दौरान आयोजित होने वाले इस अनोखे उत्सव में हिस्सा लेने और इसका गवाह बनने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित होते हैं। इस आयोजन की भव्यता और इसकी प्राचीन परंपरा को देखते हुए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए जाते हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

जाम नदी के दोनों तटों पर जुटेंगे लोग

इस मेले का मुख्य आकर्षण पांढुर्णा और सावरगांव के बीच जाम नदी के दोनों किनारों से खेला जाने वाला पत्थरों का खेल होता है। नदी के बीचों-बीच एक विशेष पेड़ लगाया जाता है, जिसे हासिल करने के लिए दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे पर दूर से पत्थर फेंकते हैं। इस पारंपरिक और जोखिम भरे मुकाबले को देखने के लिए नदी के आसपास की पहाड़ियों और छतों पर भारी भीड़ जमा होती है। हालांकि प्रशासन इस पारंपरिक आयोजन के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाता है, जिसमें चिकित्सा दलों की तैनाती और पुलिस बल की भारी मौजूदगी शामिल होती है ताकि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जा सके।

ऐतिहासिक परंपरा और सांस्कृतिक महत्व

स्थानीय लोगों की मान्यताओं के अनुसार, यह अनूठी परंपरा सदियों पुरानी है जो दो गांवों के बीच के ऐतिहासिक संबंधों और संघर्षों की दास्तां बयां करती है। इस खेल के दौरान कई लोग घायल भी हो जाते हैं, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर साल विशेष रूप से आपातकालीन चिकित्सा शिविर लगाए जाते हैं। घायलों के तुरंत उपचार के लिए एम्बुलेंस और डॉक्टरों की विशेष टीमें मौके पर तैनात रहती हैं। प्रशासन द्वारा लगातार यह प्रयास किया जाता है कि परंपरा का निर्वहन भी हो सके और कानून-व्यवस्था के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा भी पूरी तरह सुरक्षित रहे। जैसे-जैसे 11 सितंबर की तारीख नजदीक आ रही है, पांढुर्णा में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिल रहा है। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शांति समिति की बैठकें आयोजित की जा रही हैं ताकि दोनों पक्षों के प्रमुख लोगों के साथ संवाद स्थापित किया जा सके। सभी पक्षों से यह अपील की जाती है कि वे पारंपरिक उत्सव को शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं और खेल की भावना का सम्मान करें। इस विश्व प्रसिद्ध आयोजन के माध्यम से पांढुर्णा की सांस्कृतिक पहचान देश भर में एक बार फिर प्रमुखता से उभरकर सामने आती है, जिसे देखने के लिए पर्यटकों का तांता लगना तय माना जा रहा है।
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