राजधानी के रहमानपुर क्षेत्र में नगर निगम के बुलडोजर और प्रवर्तन दल की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए इस बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियान को पूरा किया। अधिकारियों को लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि इस बहुमूल्य जमीन पर स्थानीय भू-माफियाओं और कुछ दबंगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा जमाया जा रहा था। इन अवैध कब्जों के कारण न केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान हो रहा था, बल्कि क्षेत्र के सुनियोजित विकास कार्यों में भी भारी बाधा उत्पन्न हो रही थी। पुख्ता सूचना मिलने के बाद नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक सुनियोजित रणनीति बनाई और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इस पूरी कार्रवाई को अमलीजामा पहनाया। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों और कब्जाधारियों द्वारा किए गए विरोध को दरकिनार करते हुए प्रशासन ने जमीन पर खड़े अवैध निर्माणों को ढहा दिया और पूरी संपत्ति को अपने कब्जे में ले लिया। इस पूरी जमीन की बाजार में अनुमानित कीमत पांच करोड़ रुपये आंकी गई है, जो अब वापस सरकारी नियंत्रण में आ चुकी है।
इस तरह की अवैध कब्जे की समस्याएं केवल रहमानपुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे लखनऊ शहर और आसपास के इलाकों में एक गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जमीनों की आसमान छूती कीमतों के कारण सरकारी जमीनों, पार्कों और खाली भूखंडों पर भू-माफियाओं की नजरें हमेशा टिकी रहती हैं। कई मामलों में यह देखने को मिला है कि संगठित गिरोह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेशकीमती जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर लेते हैं और वहां व्यावसायिक या आवासीय निर्माण तक शुरू कर देते हैं। नगर निगम और विकास प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर ऐसे अवैध कब्जों के खिलाफ नोटिस जारी किए जाते हैं और अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कई बार कानूनी दांव-पेंच और राजनीतिक संरक्षण के कारण ये मामले लंबे समय तक खिंच जाते हैं। रहमानपुर की इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित किया है कि शहरी क्षेत्रों में सरकारी संपत्तियों की निगरानी व्यवस्था को कितना मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की अवैध गतिविधियों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके और जनता के धन तथा संपत्तियों की रक्षा की जा सके।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि नगर निगम इस मुक्त कराई गई जमीन की तुरंत घेराबंदी करेगा ताकि दोबारा इस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण न हो सके। स्थानीय अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी इस प्रकार के अवैध कब्जों के खिलाफ इसी तरह के सख्त अभियान चलाए जाएंगे। इस कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों और आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि कई लोग लंबे समय से इन अवैध गतिविधियों और इनके कारण होने वाली समस्याओं की शिकायत कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जमीन खाली कराना ही काफी नहीं है, बल्कि अवैध कब्जा करने वाले मुख्य सरगनाओं और इसमें संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने की हिम्मत न जुटा सके। नगर निगम की इस कार्रवाई ने एक कड़ा संदेश दिया है कि आने वाले समय में अवैध निर्माणों और जमीनों पर कब्जे के खिलाफ प्रशासन किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं है और शहर के विकास कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए ऐसे कदम लगातार जारी रहेंगे।