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बड़ी कार्रवाई: उत्तराखंड में सफेद नंबर प्लेट से डिलीवरी और रैपिडो राइड पर लगेगा रोक
उत्तराखंड में निजी वाहनों यानी सफेद नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का इस्तेमाल कर धड़ल्ले से सामान की डिलीवरी और कमर्शियल राइड्स देने वालों की अब खैर नहीं है। परिवहन विभाग ने इस अवैध कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
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Ankit Yadav
12 सित 2026, 11:47
उत्तराखंड के परिवहन विभाग ने राज्य में निजी वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि लोग निजी यानी सफेद नंबर प्लेट वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों का उपयोग राइड-शेयरिंग एप्लिकेशन और विभिन्न डिलीवरी सेवाओं के लिए करते हैं। मोटर वाहन अधिनियम के नियमों के अनुसार, किसी भी निजी वाहन का उपयोग वाणिज्यिक उद्देश्यों या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार की गतिविधियां न केवल कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचाती हैं। विभाग की इस नई कार्रवाई के दायरे में विशेष रूप से बाइक टैक्सी और विभिन्न ई-कॉमर्स व फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर चलने वाले वे वाहन आ रहे हैं जो बिना कमर्शियल परमिट के पंजीकृत हैं।
परिवहन विभाग की ओर से सख्त कदम और निगरानी
इस अवैध गतिविधि पर लगाम कसने के लिए राज्य भर के परिवहन अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। प्रमुख चौराहों, व्यस्त बाजारों और वाणिज्यिक केंद्रों पर चेकिंग अभियान तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई बार आम नागरिकों के निजी वाहनों को बिना उनकी जानकारी या कम दस्तावेजों के ऐसे कमर्शियल प्लेटफॉर्म्स पर धकेल दिया जाता है, जिससे सड़क सुरक्षा के नियमों की भी अनदेखी होती है। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सड़क परिवहन प्राधिकरण अब ऐसे चालकों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ भी कानूनी शिकंजा कस रहा है जो इस प्रकार के गैर-कानूनी परिवहन तंत्र को बढ़ावा दे रहे हैं। पकड़े जाने पर भारी जुर्माने के साथ-साथ वाहनों को सीज करने जैसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी की जा रही है।
यात्री सुरक्षा और नियमों का अनुपालन
कमर्शियल गतिविधियों के लिए पीले रंग की नंबर प्लेट अनिवार्य होती है जो यह दर्शाती है कि वाहन का पंजीकरण यात्री ढोने या माल ढुलाई के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए अधिकृत है। इसके विपरीत, सफेद नंबर प्लेट वाले वाहनों में न तो कमर्शियल बीमा होता है और न ही यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े वे तमाम मानक पूरे होते हैं जो व्यावसायिक वाहनों के लिए अनिवार्य रूप से तय किए गए हैं। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है, तो बीमा दावों के निपटारे में भी गंभीर कानूनी अड़चनें पैदा होती हैं। परिवहन विभाग का यह कड़ा रुख न केवल अवैध परिवहन को रोकने के लिए है, बल्कि आम जनता और यात्रियों की सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में भी एक अहम कदम है।
राइडर्स और कंपनियों के सामने नई चुनौतियां
परिवहन विभाग द्वारा उठाए गए इन कदमों से उन हजारों युवाओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है जो बिना कमर्शियल परमिट के अपनी बाइक या कारों से राइड-शेयरिंग और डिलीवरी का काम कर रहे थे। हालांकि, विभाग का स्पष्ट मत है कि नियमों के दायरे में रहकर ही कोई भी व्यावसायिक गतिविधि संचालित की जानी चाहिए। दूसरी ओर, रैपिडो जैसी राइड-हेलिंग कंपनियों और विभिन्न डिलीवरी एग्रीगेटर्स को भी अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करने और केवल व्यावसायिक रूप से पंजीकृत वाहनों को ही अपने नेटवर्क से जोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस अभियान के और अधिक आक्रामक होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे राज्य में अवैध परिवहन प्रथाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।