कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
सौरभ दास और आशुतोष रांका की बढ़ेंगी मुश्किलें? आज SEM कोर्ट में पेशी      'मक्का चुम्मा-चाटी की जगह नहीं', बांग्लादेशी कपल को सऊदी अरब ने दी मौत, तो किस कांड पर भड़कीं नाजिया खान      गोल्डी ने कहा था- घर गिरा दो, वापस नहीं आऊंगा: लॉरेंस के साथ गैंगस्टर बना, अमेरिका को तलाश; पंजाब में घर खा...      न टैंक, न मिसाइल, फिर भी यूरोप के 13 देशों में बजा भारत के हथियारों का डंका, 1600% उछला एक्सपोर्ट      पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से बात की: चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे, दुनियाभर में 350 से ज्य...      तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 16 लोगों की मौत, सैकड़ों ज़ख़्मी      'भारत चीन बॉर्डर पर आमने-सामने की स्थिति जारी', आईटीबीपी के डीजी के बयान पर सियासत गरमाई      Live: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन, नेहा बोरा केस में फैसला आज, दिल्ली पुलिस अलर्ट     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
लोकल

बड़ी नौकरी छोड़ वतन वापसी: कनाडा में छह साल और लाखों के पैकेज के बाद महिला ने छोड़ी डेलॉइट की नौकरी

विदेश में लाखों के वेतन और शानदार जीवनशैली को छोड़कर स्वदेश लौटने का फैसला लेना आसान नहीं होता है। कनाडा में छह साल तक डेलॉइट जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था में अपनी सेवाएं देने के बाद एक महिला ने भारत वापस आने का बड़ा निर्णय लिया है। यह वाकया पेशेवर महत्वाकांक्षाओं से परे मातृभूमि के प्रति लगाव और पारिवारिक जड़ों की अहमियत को रेखांकित करता है।

A
Ankit Yadav
23 सित 2026, 13:38
बड़ी नौकरी छोड़ वतन वापसी: कनाडा में छह साल और लाखों के पैकेज के बाद महिला ने छोड़ी डेलॉइट की नौकरी

कनाडा में छह साल और डेलॉइट की नौकरी का सफर विदेश में करियर की ऊंचाइयों को छूना हर युवा का सपना होता है और इस महिला ने भी अपनी मेहनत के दम पर कनाडा की धरती पर एक मुकाम हासिल किया था। वहां रहते हुए उसने करीब छह साल तक बहुराष्ट्रीय कंपनी डेलॉइट में काम किया जहां उसे आकर्षक लाखों का पैकेज मिलता था। पेशेवर मोर्चे पर उसका जीवन बेहद स्थिर और आरामदायक था क्योंकि उसके पास बेहतरीन सुविधाएं और भविष्य की मजबूत योजना थी। इसके बावजूद उसके भीतर लगातार अपनी मातृभूमि लौटने की तीव्र इच्छा सुलग रही थी जो विदेशी चमक-धमक और भौतिक सुख-सुविधाओं से कहीं अधिक भारी पड़ रही थी। अंततः उसने कॉरपोरेट दुनिया की इस सुनहरी बेड़ी को तोड़ने का फैसला किया और अपनी इस उच्च पद वाली नौकरी को अलविदा कह दिया। उसके इस कदम ने सोशल मीडिया और पेशेवर हलकों में खासी चर्चा बटोरी है क्योंकि इतनी मोटी सैलरी और विदेश में स्थायी निवास जैसी संभावनाओं को छोड़ना आम बात नहीं है। यह घटना दर्शाती है कि कई बार आंतरिक संतोष और अपनों का साथ भौतिक संपदा और विदेशी मुद्रा से कहीं ज्यादा मूल्यवान साबित होता है।

मातृभूमि का आकर्षण और विदेश में प्रवासियों की दुविधा आधुनिक दौर में बेहतर भविष्य की तलाश में लाखों भारतीय हर साल पश्चिमी देशों का रुख करते हैं जहां उन्हें भारी भरकम वेतन और उन्नत जीवन स्तर का लालच खींचता है। हालांकि जब कोई पेशेवर व्यक्ति विदेश में छह साल जैसे लंबे समय तक टिक जाता है और डेलॉइट जैसी दिग्गज कंपनी में स्थापित हो जाता है तो उसका वापस लौटना एक बड़ा बदलाव माना जाता है। इस प्रकार के निर्णय के पीछे अक्सर सांस्कृतिक अलगाव अपने देश के सामाजिक ताने-बाने की कमी और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल जैसी गहरी भावनात्मक वजहें जुड़ी होती हैं। विदेश की चकाचौंध भले ही पहली नजर में बहुत आकर्षक लगे लेकिन वहां की अकेली और यंत्रवत जिंदगी कई बार इंसानी संवेदनाओं पर भारी पड़ने लगती है। भारत लौटने की यह जिद केवल एक नौकरी छोड़ने का मामला नहीं है बल्कि यह उस मानसिक द्वंद्व का परिणाम है जो हर उस प्रवासी के मन में चलता रहता है जो अपनी जड़ों से दूर रहता है। इस तरह के मामलों में जब लोग अपनी आरामदायक जिंदगी को दांव पर लगाकर वापस आते हैं तो यह समाज के लिए भी एक सोचने योग्य विषय बन जाता है कि विकास की अंधी दौड़ में हम अपनी प्राथमिकताओं को किस दिशा में ले जा रहे हैं।

स्वदेश वापसी पर भविष्य की नई राहें और प्रतिक्रियाएं लाखों के पैकेज वाली कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर भारत लौटने के इस साहसिक निर्णय पर सोशल मीडिया से लेकर व्यावसायिक जगत तक में विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे आर्थिक दृष्टिकोण से एक मूर्खतापूर्ण फैसला मान रहे हैं क्योंकि इतनी बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी की नौकरी और विदेशी करियर को छोड़ना आसान नहीं होता है। वहीं दूसरी ओर एक बड़ा वर्ग इस महिला के इस जज्बे की सराहना कर रहा है जो भौतिक सफलता के बजाय अपनों के बीच रहकर काम करने को प्राथमिकता दे रही है। भारत में आज के समय में स्टार्टअप संस्कृति और कॉर्पोरेट सेक्टर का तेजी से विस्तार हो रहा है जिसके कारण वापस लौटने वाले पेशेवरों के लिए यहां भी अवसरों की कोई कमी नहीं है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने इस लंबे विदेशी अनुभव और कौशल का उपयोग भारतीय बाजार में किस प्रकार करती है और अपने करियर को नया आयाम देती है। इस प्रकार के उदाहरण आने वाले दिनों में अन्य युवाओं को भी अपनी मिट्टी से जुड़ने और बड़े फैसलों से न डरने की प्रेरणा दे सकते हैं जिससे देश के भीतर ही प्रतिभाओं का लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज