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खंडहर स्वास्थ्य केंद्र: प्रयागराज में बदहाल आयुष्मान आरोग्य मंदिर से ग्रामीण परेशान

प्रयागराज में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है जहाँ स्थानीय लोगों को बुनियादी चिकित्सा सुविधा के अभाव में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में स्थापित सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों की उपेक्षा के कारण आम जनता को भारी दूरी तय करने पर विवश होना पड़ रहा है।

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Ankit Yadav
20 सित 2026, 17:14
खंडहर स्वास्थ्य केंद्र: प्रयागराज में बदहाल आयुष्मान आरोग्य मंदिर से ग्रामीण परेशान

प्रयागराज में बदहाल स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति प्रयागराज क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक प्रमुख आयुष्मान आरोग्य मंदिर की वर्तमान में अत्यंत दयनीय और खंडहर जैसी हालत बनी हुई है जिसके कारण स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस स्वास्थ्य केंद्र की दीवारों से प्लास्टर उखड़ चुका है और दरवाजों तथा खिड़कियों का नामोनिशान मिटता जा रहा है जिससे यह इमारत किसी वीरान खंडहर की भांति प्रतीत होती है। देखरेख के अभाव में इस चिकित्सा इकाई के भीतर जंगली घास और झाड़ियां उग आई हैं तथा चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है। इस प्रकार की उपेक्षा के कारण क्षेत्र के बीमार लोगों को बुनियादी चिकित्सीय परामर्श और प्राथमिक उपचार जैसी सामान्य सुविधाएं भी इस केंद्र पर नहीं मिल पा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तमाम शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाने की जहमत नहीं उठाई है जिससे स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती चली जा रही है और सरकारी धन का यह दुरुपयोग साफ तौर पर नजर आ रहा है।

ग्रामीणों की मजबूरी और लंबी दूरी की यात्रा स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर केवल कागजी दावे करने वाली ऐसी योजनाओं की जमीनी हकीकत का खामियाजा आम ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी अपने घरों से मीलों दूर जाने की मजबूरी बनी हुई है। मौजूदा स्थिति यह है कि स्थानीय लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए अपने गांवों से लगभग दस किलोमीटर की लंबी और कष्टदायक दूरी तय करके अन्य स्थानों पर स्थित अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। आवागमन के साधनों की उचित व्यवस्था न होने और समय पर वाहन न मिलने के कारण गंभीर रोगियों तथा बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जिससे कई बार स्थिति जानलेवा तक बन जाती है। इस प्रकार की स्वास्थ्य संरचनाओं का उद्देश्य ग्रामीण आंचल में रहने वाले गरीब और वंचित तबके तक आसानी से चिकित्सा सुविधा पहुंचाना था ताकि उन्हें जिला मुख्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। परंतु विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती के कारण यह उद्देश्य पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपनी छोटी-छोटी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए भी भारी आर्थिक और शारीरिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता और आगे की राह ग्रामीणों द्वारा इस मामले में कई बार संबंधित विभागों और उच्च अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं परंतु अब तक किसी भी प्रकार की सकारात्मक कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। स्थानीय जनता का कहना है कि जब तक प्रशासन इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कदम नहीं उठाता तब तक इस खंडहरनुमा ढांचे से किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य सेवा की उम्मीद करना पूरी तरह से व्यर्थ साबित होगा। इस प्रकार की घटनाओं से सरकार की उन महत्वाकांक्षी योजनाओं पर भी बड़ा सवालिया निशान लगता है जिनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत की कायापलट करना और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाना है। आने वाले समय में यदि इस आरोग्य मंदिर की सुधि नहीं ली गई तो स्थानीय लोग बड़े स्तर पर आंदोलन करने और सामूहिक रूप से प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं ताकि शासन-प्रशासन की नींद खुल सके। स्थानीय नागरिकों की केवल यही मांग है कि इस केंद्र का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार कराया जाए ताकि उन्हें अपने ही क्षेत्र में बेहतर और सुलभ चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें और उन्हें दस किलोमीटर की लंबी दूरी तय करने से मुक्ति मिल सके।

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