गोरखपुर और पूर्वांचल में भारी वर्षा से गिरा पारा उत्तर प्रदेश के पूर्वी अंचल यानी गोरखपुर और उसके आसपास के जिलों में मौसम ने अचानक एक नया मोड़ ले लिया है जिसके परिणामस्वरूप यहां लगातार मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। इस अप्रत्याशित मानसूनी सक्रियता और लगातार बरस रहे बादलों के कारण क्षेत्र के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है जिससे आम जनजीवन पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। आधिकारिक मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार इस तीव्र वर्षा की वजह से तापमान लुढ़ककर सीधे 24.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है जो सामान्य से काफी नीचे है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में इस स्तर का तापमान अमूमन देखने को नहीं मिलता है और इस भारी गिरावट ने पिछले पूरे 19 वर्षों के रिकॉर्ड को पूरी तरह से पीछे छोड़ दिया है। लगातार चल रही ठंडी हवाओं और आसमान में छाए घने बादलों की वजह से इस क्षेत्र के लोगों को सितंबर के महीने में ही सर्दियों जैसी कंपकंपी का अहसास होने लगा है और धूप न निकलने के कारण तापमान में लगातार स्थिरता बनी हुई है।
मौसम में अचानक आए इस बदलाव की भौगोलिक पृष्ठभूमि इस प्रकार के अप्रत्याशित मौसम बदलाव और भारी बारिश के पीछे आमतौर पर वायुमंडलीय दबाव में बदलाव और बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाली नमी युक्त मानसूनी हवाओं का सक्रिय होना मुख्य कारण माना जाता है। इस क्षेत्र में जब कम दबाव का क्षेत्र बनता है तो बादलों की आवाजाही तेज हो जाती है और लंबी अवधि तक लगातार वर्षा होने से वातावरण में ठंडक घुल जाती है। कृषि और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार इस समय पूर्वांचल के जिलों में बादलों की सघनता और निरंतर हो रही मानसूनी बौछारें तापमान को तेजी से नीचे गिराने का काम करती हैं। इस तरह की मौसमी परिघटनाएं पिछले लगभग दो दशकों में बहुत कम बार देखी गई हैं जब सितंबर के महीने में इतनी अधिक ठंडक महसूस की गई हो। इस प्रकार के मौसमी उतार-चढ़ाव स्थानीय जलवायु चक्र और क्षेत्रीय मानसूनी प्रणालियों के आपसी तालमेल का परिणाम होते हैं, जिनका अध्ययन मौसम वैज्ञानिक गहराई से करते हैं ताकि भविष्य के पूर्वानुमान सटीक बैठ सकें और आम जनता को पहले ही आगाह किया जा सके।
दैनिक जीवन और कृषि गतिविधियों पर संभावित प्रभाव इस अचानक हुई भारी बारिश और तापमान में आई भारी गिरावट का असर न केवल आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ा है बल्कि यह कृषि और स्थानीय व्यापार के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। मौसम के इस प्रकार अचानक ठंडे हो जाने से लोगों को गर्मी और उमस से तो भारी राहत मिली है, परंतु लगातार पानी गिरने के कारण निचले इलाकों में जलभराव की छोटी-मोटी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। किसानों के दृष्टिकोण से यदि देखा जाए तो इस समय हो रही मानसूनी वर्षा धान और अन्य खरीफ फसलों के लिए फायदेमंद हो सकती है बशर्ते खेतों में अत्यधिक जलभराव न हो जाए। आने वाले दिनों में यदि तापमान इसी तरह कम बना रहा तो लोगों को अपने पहनावे में बदलाव करना पड़ सकता है और सुबह-शाम हल्के गर्म कपड़ों की आवश्यकता महसूस होने लगेगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह मानना है कि मौसम में इस प्रकार के अचानक बदलाव के समय लोगों को सर्दी-जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि वे पूरी तरह से स्वस्थ रह सकें।