कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
'मक्का चुम्मा-चाटी की जगह नहीं', बांग्लादेशी कपल को सऊदी अरब ने दी मौत, तो किस कांड पर भड़कीं नाजिया खान      शिवा शर्मा कांड: पूछताछ के दौरान सांस की तकलीफ का बहाना बनाती रही श्रद्धा दुबे! नेपाल भागने में बॉयफ्रेंड आमिर ने की मदद      सौरभ दास और आशुतोष रांका की बढ़ेंगी मुश्किलें? आज SEM कोर्ट में पेशी      'गलवान ने दिखा दिया भारत-चीन सीमा विवाद का सैन्य समाधान अब संभव नहीं', पूर्व आर्मी चीफ नरवणे का बड़ा बयान      EC के अफसर पर बिना चर्चा फैसले लेने का आरोप: RTI से खुलासा- दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकाय...      आजम खान से केवल इसलिए मिलना चाहते थे अखिलेश? AIMIM के वारिस पठान ने किया ये दावा      Live: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन, नेहा बोरा केस में फैसला आज, दिल्ली पुलिस अलर्ट      हूती हमलों के बीच सऊदी अरब से सुरक्षित लौट रहे उमरा जायरीन, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने किया कंफर्म     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
लोकल

फसल बर्बादी का संकट: बेमौसम बारिश से धान की फसल नष्ट होने पर किसानों ने मांगा मुआवजा और आवास की गुहार

बेमौसम हुई भारी बारिश ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है जिससे धान की तैयार फसल को भारी क्षति पहुँची है। इसके साथ ही गरीब परिवारों की झोपड़ियों में पानी भर जाने से उनके सामने सिर छिपाने का गंभीर संकट पैदा हो गया है। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से तत्काल वित्तीय सहायता और सुरक्षित आवास की गुहार लगाई है।

A
Ankit Yadav
25 सित 2026, 14:22
फसल बर्बादी का संकट: बेमौसम बारिश से धान की फसल नष्ट होने पर किसानों ने मांगा मुआवजा और आवास की गुहार

अचानक हुई मूसलाधार बारिश से धान की फसल और रिहायशी झोपड़ियों को भारी नुकसान हाल ही में मौसम के बदले मिजाज और अचानक हुई बेमौसम मूसलाधार बारिश ने ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही मचाई है, जिसका सीधा असर कृषि और गरीब परिवारों के जीवन पर पड़ा है। खेतों में लहलहाती धान की फसल इस जलभराव और तेज हवाओं के कारण बड़े पैमाने पर बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत पानी में डूब गई है। केवल खेती ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनी कच्ची झोपड़ियां और रिहायशी ठिकाने भी इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गए हैं। लगातार हुई बारिश का पानी लोगों के रहने वाले आशियानों के अंदर तक भर गया है, जिससे रोजमर्रा का सामान, खाने-पीने का अनाज और बिस्तर पूरी तरह भीग कर खराब हो चुके हैं। इस विपत्तिपूर्ण स्थिति के कारण प्रभावित परिवारों को खुले आसमान के नीचे रहने या रिश्तेदारों के यहाँ शरण लेने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनका पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और वे गहरी आर्थिक तथा मानसिक चिंता में डूब गए हैं।

किसानों की आर्थिक कमर टूटने और आवास की मांग पर प्रशासन की कार्यप्रणाली इस प्रकार की बेमौसम आपदाएं कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले ग्रामीण क्षेत्रों में गहरी चोट करती हैं जहाँ किसानों की आजीविका पूरी तरह से उनकी मौसमी पैदावार पर निर्भर होती है। जब कटाई या पकने के चरण में फसल को इस तरह का भारी नुकसान पहुँचता है, तो किसान के सामने कर्ज चुकाने और परिवार का भरण-पोषण करने का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। इस संकट की घड़ी में पीड़ित किसानों और बेघर हुए परिवारों ने एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी आवाज उठाई है और तुरंत सरकारी सहायता की माँग की है। नियमों के अनुसार प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व विभाग और कृषि अधिकारियों द्वारा सर्वे कराया जाता है ताकि वास्तविक क्षति का पता चल सके। झोपड़ियों में पानी भरने से बेघर हुए गरीबों ने शासन से यह भी माँग की है कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य राहत कार्यक्रमों के तहत सुरक्षित पक्के मकान मुहैया कराए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

मुआवजे की आस और प्रशासनिक सर्वे के बाद राहत मिलने की संभावना प्रभावित किसानों और बेघर हुए परिवारों द्वारा मुआवजा तथा आवास की माँग उठाए जाने के बाद अब स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों पर त्वरित कार्रवाई करने का भारी दबाव बढ़ गया है। नियमानुसार प्रशासनिक अमले को ऐसे मामलों में तत्काल प्रभाव से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर फसल नुकसान और संपत्ति की हानि की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होती है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही शासन स्तर से किसानों के बैंक खातों में आर्थिक सहायता या अनुग्रह राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाती है ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता के साथ नुकसान का आंकलन पूरा करके पीड़ितों तक मुआवजा पहुँचाता है। इसके अलावा, जिन परिवारों की झोपड़ियाँ पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं या जिनमें पानी भरने से रहना असंभव हो गया है, उन्हें पुनर्वास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर सहायता देने की उम्मीद जताई जा रही है ताकि ग्रामीण जनता का व्यवस्था से विश्वास न डगमगाए।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज