हिरुआ गांव में राप्ती नदी का तेज कटान
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के अंतर्गत आने वाले पीपीगंज क्षेत्र में स्थित हिरुआ गांव के सामने राप्ती नदी का जलस्तर और कटान बहुत अधिक तेज हो गया है। वहां रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों ने इस बात की जानकारी दी है कि नदी के इस भयंकर बहाव और कटान की वजह से उनकी कई एकड़ उपजाऊ भूमि सीधे नदी में समा चुकी है। इस गंभीर स्थिति के कारण वहां के किसानों और आम नागरिकों की मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने यह कड़ी मांग रखी है कि इस क्षेत्र में तुरंत कटानरोधी कार्य शुरू किए जाएं ताकि आगे के नुकसान को रोका जा सके। इसके अलावा उन्होंने नदी के पानी को रोकने के लिए पक्की ठोकरों के निर्माण की भी पुरजोर मांग उठाई है ताकि उनकी जमीनों और रास्तों को सुरक्षित बचाया जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों का बाढ़ संभावित क्षेत्रों का दौरा
स्थानीय स्तर पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बांसगांव क्षेत्र के उपजिलाधिकारी मलखान सिंह ने तहसीलदार सुशील कुमार भारती के साथ मिलकर बाढ़ के खतरे वाले कई गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने करजहीं, कतरारी, अईमा और बेला जैसे प्रमुख गांवों का दौरा करके वहां के जमीनी हालात का जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने सभी संबंधित राजस्वकर्मियों को यह सख्त निर्देश दिए कि वे लगातार इन क्षेत्रों का भ्रमण करते रहें। अधिकारियों ने जलस्तर की निगरानी बेहद बारीकी से करने को कहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से वक्त रहते निपटा जा सके। सहजनवां क्षेत्र के उपजिलाधिकारी नमन मेहता ने भी बरहुआ बाढ़ चौकी का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण किया। उन्होंने कालेसर-बरहुआ बांध के रेनकट को तुरंत भरने के निर्देश जारी किए और पत्थर की ठोकरों की सुरक्षा पर विशेष नजर रखने को कहा।
नदियों का बढ़ा हुआ जलस्तर और किसानों को राहत
एक तरफ जहां राप्ती नदी का कटान ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ आमी नदी का जलस्तर बढ़ने से कुछ इलाकों में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिला है। आमी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण परई ताल पूरी तरह से पानी से लबालब भर गया है। इस जलभराव से उन किसानों को बहुत बड़ी राहत मिली है जो अपनी फसलों की सिंचाई को लेकर काफी लंबे समय से चिंतित और परेशान चल रहे थे। प्रशासन की तरफ से सभी बाढ़ चौकियों को पूरी तरह से सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जलस्तर से जुड़ी हर सूचना समय रहते साझा की जा सके। अधिकारी लगातार स्थिति पर अपनी नजर बनाए हुए हैं और जमीनी कर्मचारियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने का आदेश दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तैयारी रखी जा सके।