निर्माण के कुछ ही दिनों बाद नवलपुर लार मार्ग की खुली पोल नवलपुर से लार को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क पर आधुनिक फुल डेप्थ रिक्लेमेशन यानी एफडीआर तकनीक का इस्तेमाल करके निर्माण कार्य पूरा किया गया था ताकि मार्ग अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सके। परंतु ठेकेदारों और संबंधित निर्माण एजेंसियों की घोर लापरवाही के कारण यह सड़क चंद हफ्तों या महीनों का भी सामना नहीं कर पाई और शुरुआती बारिश या सामान्य इस्तेमाल से ही उखड़नी शुरू हो गई। वर्तमान स्थिति यह है कि इस पूरे मार्ग पर जगह-जगह इतने बड़े और गहरे गड्ढे उभर आए हैं कि उनमें पानी का भारी भराव हो चुका है। जलभराव के कारण इन गड्ढों की गहराई का अनुमान लगाना किसी भी वाहन चालक के लिए असंभव हो गया है, जिसके चलते रोजमर्रा आने-जाने वाले बाइक सवार, साइकिल चालक और पैदल यात्री गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस उम्मीद के साथ इस सड़क का आधुनिकीकरण किया गया था, वह पूरी तरह से धूमिल हो चुकी है और इस घटिया निर्माण ने आम जनता के जीवन को खतरे में डाल दिया है।
आधुनिक निर्माण तकनीकों की जमीनी हकीकत और जवाबदेही पर सवाल सड़क निर्माण के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधारने और समय बचाने के नाम पर लाई जाने वाली एफडीआर तकनीक पर अब गंभीर और तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं। इस आधुनिक विधि के तहत पुरानी सड़क की सामग्री को ही नए रसायन और एग्रीगेट के साथ मिलाकर मजबूत बेस तैयार किया जाता है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और मॉनिटरिंग के अभाव में धरातल पर मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जाती हैं। नवलपुर-लार मार्ग के मामले में भी यह साफ तौर पर उजागर हुआ है कि कागजों पर जिन उच्च कोटि के मानकों और सामग्रियों का जिक्र किया गया था, उनका पालन स्थल पर बिल्कुल नहीं हुआ। ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री के इस्तेमाल और बेस तैयार करने में बरती गई तकनीकी खामियों के कारण ही पहली ही चुनौती में यह सड़क नेस्तनाबूद हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों और संपर्क मार्गों को मुख्य शहरों से जोड़ने वाली ऐसी योजनाओं में अक्सर बजट का बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है, जिसका खामियाजा अंततः आम नागरिकों को अपनी जान और सेहत जोखिम में डालकर भुगतना पड़ता है।
स्थानीय जनता का कड़ा आक्रोश और उच्चस्तरीय जांच की मांग इस खतरनाक और जर्जर सड़क के कारण हो रहे लगातार हादसों से त्रस्त होकर स्थानीय नागरिकों तथा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जनता का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। लोगों की मांग है कि इस पूरे निर्माण प्रोजेक्ट की फाइल मंगवाकर तकनीकी विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र टीम से इसकी जांच कराई जाए ताकि यह पता चल सके कि किस स्तर पर धन का दुरुपयोग हुआ है और मानकों की अनदेखी की गई है। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन पर भी यह दबाव बनाया जा रहा है कि वह तुरंत प्रभाव से इस मार्ग की मरम्मत करवाए या नए सिरे से इसका पक्का निर्माण सुनिश्चित करे ताकि रोजाना आवागमन करने वाले हजारों स्कूली बच्चों, कामकाजी लोगों और बुजुर्गों को इस नरकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।