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सड़कें बदहाल: शंकरगढ़ बाजार और ऋषि टोला मार्ग पर गड्ढों में भरा पानी

स्थानीय बाजारों और मार्गों पर फैली बदहाली के कारण नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शंकरगढ़ बाजार और ऋषि टोला मार्ग की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि गड्ढों में जलभराव आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है। इस समस्या से व्यापार और दैनिक आवागमन दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

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Ankit Yadav
21 सित 2026, 16:11
सड़कें बदहाल: शंकरगढ़ बाजार और ऋषि टोला मार्ग पर गड्ढों में भरा पानी

शंकरगढ़ बाजार और ऋषि टोला मार्ग की गंभीर स्थिति स्थानीय निवासियों और दुकानदारों को इन दिनों आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि शंकरगढ़ बाजार और ऋषि टोला मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। इन रास्तों पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में गंदा पानी भरा हुआ है, जिससे वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वालों को भी भारी जोखिम उठाना पड़ता है। बारिश के मौसम और जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण यह समस्या और अधिक विकराल रूप धारण कर चुकी है। सड़कों पर फैली इस बदहाली के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर चोटिल हो रहे हैं, और चार पहिया वाहनों के नीचे फंसने का डर भी लगातार बना रहता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों का आवागमन कम होने से उनके व्यवसाय पर भी सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि कोई भी ग्राहक इन कीचड़ और पानी से भरे रास्तों को पार करके दुकानों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहा है।

बुनियादी ढांचे की अनदेखी और जनजीवन पर इसका प्रभाव शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव किस प्रकार आम आदमी के जीवन को प्रभावित करता है, इसका यह एक स्पष्ट उदाहरण है। जब सड़कों के निर्माण और रख-रखाव में लापरवाही बरती जाती है, तो जलभराव जैसी समस्याएं स्वतः उत्पन्न होने लगती हैं। शंकरगढ़ बाजार जैसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र और ऋषि टोला जैसे रिहायशी इलाकों में सीवर और जल निकासी का उचित प्रबंध न होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है। इस तरह की समस्याओं से न केवल स्थानीय व्यापारिक गतिविधियां बाधित होती हैं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गहरा आघात पहुंचता है। जब माल ढोने वाले वाहन और ग्राहक इन रास्तों से कतराने लगते हैं, तो दुकानदारों का दैनिक कारोबार सिमट जाता है। इसके अलावा, गड्ढों में भरे पानी से मच्छर पनपने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी हमेशा बनी रहती है। नागरिकों द्वारा बार-बार अपनी समस्याएं उठाने के बावजूद जब तक समय पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक इस प्रकार की बुनियादी परेशानियां आम जनता का पीछा नहीं छोड़ती हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई की मांग और भविष्य की चिंताएं इस विकट परिस्थिति से जूझ रहे स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने अब संबंधित विभागों तथा स्थानीय प्रशासन से शीघ्र ठोस कदम उठाने की पुरजोर मांग की है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इन गड्ढों को भरकर सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई और जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई, तो स्थिति और अधिक विस्फोटक हो सकती है। आने वाले दिनों में यदि मानसून या बारिश का दौर फिर से जोर पकड़ता है, तो इन रास्तों पर पैदल चलना भी दूभर हो जाएगा, जिससे जनजीवन पूरी तरह ठप हो सकता है। व्यापारी संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो उन्हें मजबूरन बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। स्थानीय प्रशासन और संबंधित ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने का समय आ गया है ताकि जनता के करों से मिलने वाले राजस्व का सदुपयोग कर बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त किया जा सके और लोगों को इस नरकीय जीवन से मुक्ति दिलाई जा सके।

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