घग्गर नदी के घाटों पर चला सफाई महाअभियान विश्व नदी दिवस के महत्वपूर्ण अवसर पर पंचकूला शहर में स्थित घग्गर नदी के विभिन्न घाटों पर एक व्यापक और प्रभावी स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया जिसमें नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया। इस विशेष सफाई अभियान के दौरान स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मिलकर भारी मात्रा में फैली गंदगी को साफ किया। अभियान के समापन पर जब एकत्र किए गए कचरे का आकलन किया गया तो अधिकारियों ने बताया कि घग्गर तटों के आसपास से कुल 20 टन कचरा सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया है। इस भारी भरकम कचरे में मुख्य रूप से प्लास्टिक की थैलियां, पुरानी पूजन सामग्री, बोतले और अन्य प्रकार का गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा शामिल था जो लंबे समय से नदी के किनारों पर जमा होकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा था। नगर के प्रशासनिक अधिकारियों और स्वच्छता कर्मियों ने इस पूरी प्रक्रिया में दिन-रात मेहनत करके नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को राहत पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
शहरी जल स्रोतों के संरक्षण की गंभीर आवश्यकता भारत में न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी नदियों का विशेष महत्व माना गया है और आधुनिक समय में इनका संरक्षण हर नागरिक का प्राथमिक कर्तव्य बन चुका है। पंचकूला जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी इलाकों में घग्गर नदी एक प्रमुख जल स्रोत है जिसके दोनों किनारों पर बढ़ती आबादी और औद्योगिक कचरे के कारण प्रदूषण का संकट लगातार गहराता जा रहा है। विश्व नदी दिवस जैसे मौकों पर ऐसे बड़े सफाई अभियानों का आयोजन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं होता बल्कि यह समाज को यह याद दिलाने का माध्यम है कि हमारे जल स्रोत किस प्रकार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय निकायों और पर्यावरणविदों का हमेशा से यह मानना रहा है कि जब तक आम जनता खुद आगे आकर कचरा फैलाने से तौबा नहीं करेगी और कूड़े को उचित स्थानों पर नहीं डालेगी, तब तक केवल प्रशासनिक कोशिशों से स्थायी सुधार लाना बहुत कठिन होगा। इस प्रकार के अभियानों से न केवल जल स्रोतों की निर्मलधारा बहाल होती है बल्कि नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना भी जागृत होती है जो भविष्य के लिए बेहद आवश्यक है।
पर्यावरण सुरक्षा और भविष्य की कार्ययोजना घग्गर नदी के घाटों से एक ही दिन में 20 टन कचरा निकाले जाने की इस घटना के बाद अब स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों ने भविष्य के लिए कई कड़े कदम उठाने का मन बनाया है ताकि दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। प्रशासन की योजना है कि नदी के प्रमुख घाटों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाए ताकि कोई भी व्यक्ति नदी क्षेत्र में अवैध रूप से कचरा या मलबा न फेंक सके। इसके साथ ही, शहर के विभिन्न रिहायशी इलाकों और बाजारों में विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे जिनमें लोगों को सूखा और गीला कचरा अलग करने तथा उसे केवल निर्धारित कूड़ेदानों में ही डालने की समझाइश दी जाएगी। पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन के इस कदम की सराहना की है लेकिन साथ ही यह भी मांग की है कि इस तरह के स्वच्छता अभियानों को केवल विशेष दिवसों तक सीमित न रखकर हर महीने नियमित रूप से चलाया जाना चाहिए। आने वाले दिनों में यदि इन योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया गया तो पंचकूला की यह जीवनदायिनी नदी पूरी तरह से स्वच्छ और निर्मल रूप धारण कर सकेगी जिससे शहर के भूजल स्तर और पर्यावरण दोनों को ही दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।