कानपुर चिड़ियाघर में गैंडों के परिवार का ऐतिहासिक विस्तार विश्व गैंडा दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख कानपुर प्राणी उद्यान से एक ऐसा विवरण सामने आया है जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए बेहद खुशी का विषय है। यहाँ की स्थानीय व्यवस्था और संरक्षण प्रयासों के चलते शुरुआती दौर के मात्र दो गैंडों की संख्या में लगातार इजाफा दर्ज किया गया है और अब यह परिवार कुल ग्यारह सदस्यों तक पहुँच चुका है। इस विशेष सफलता ने न केवल प्रादेशिक बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। विभागीय अधिकारियों और देखभाल करने वाले कर्मचारियों की लंबी मेहनत के बाद यह मुकाम हासिल हुआ है, जिससे चिड़ियाघर परिसर में एक अलग ही उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी पर्यटक इस विस्तारित परिवार को देखने के लिए उत्सुकता से पहुँच रहे हैं और यहाँ की व्यवस्थाओं की सराहना कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजी कानपुर के संरक्षण कार्यों की गूंज इस प्राणी उद्यान में जिस प्रकार से वन्यजीवों विशेषकर एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण और प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है, उसकी चर्चा अब सुदूर देशों तक फैल चुकी है। जापान जैसे उन्नत देश तक इस उपलब्धि की गूंज पहुँचना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय चिड़ियाघरों में भी अब विश्व स्तरीय मानकों का पालन किया जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के लिए प्राकृतिक आवास जैसी सुविधाएँ देना अनिवार्य होता है और कानपुर के इस संस्थान ने इस दिशा में एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। इस प्रकार की खबरें यह भी साबित करती हैं कि यदि सही दिशा में सुनियोजित प्रयास किए जाएँ तो कठिन परिस्थितियों में भी जीवों की संख्या को सफलतापूर्वक बढ़ाया जा सकता है। जापान और अन्य विदेशी संस्थानों से आने वाले वन्यजीव अध्येता भी यहाँ के प्रबंधन तौर-तरीकों का अध्ययन करने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।
भविष्य की योजनाएँ और वन्यजीव संरक्षण का बढ़ता दायरा गैंडों के इस कुनबे के बढ़ने से आने वाले दिनों में देश के अन्य प्राणी उद्यानों के साथ एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम और वैज्ञानिक अनुसंधान को भी नया बल मिलेगा। प्रबंधन की ओर से अब इन सभी ग्यारह सदस्यों के स्वास्थ्य परीक्षण, खानपान और सुरक्षा के लिए और अधिक आधुनिक और पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि वे पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफलताएँ देश के आम नागरिकों के बीच पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करती हैं। आने वाले समय में यहाँ पर्यटकों की संख्या में भी और अधिक बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है, जिससे स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद अब विभाग का पूरा ध्यान इन सभी जीवों की दीर्घकालिक देखभाल और उनके प्राकृतिक व्यवहार को सहेजने पर केंद्रित हो गया है ताकि यह मॉडल आगे भी निरंतर सफल बना रहे।