पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में गंभीर गड़बड़ियां
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में भारी विसंगतियां पाई गई हैं, जिसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी गड़बड़ी की पुष्टि की है। शिकायत है कि एक ही ईपीआईसी नंबर पर अलग-अलग लोगों के नाम और विवरण दिखाई दे रहे हैं। ईपीआईसी एक विशिष्ट अल्फ़ान्यूमेरिक पहचान कोड होता है जो मतदाता की पहचान के लिए उपयोग किया जाता है। कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया है कि अप्रैल 2026 में अंतिम सूची जारी होने के उपरांत जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं के नाम में बदलाव कर दिए गए थे। उनके वोटर आईडी और सीरियल नंबर तो पहले वाले ही रहे, लेकिन उन पर अंकित नाम बदल गए। इसके अलावा, पीलीभीत सदर से 804 नामों को हटाया गया और 2,600 नए नाम शामिल करने का दावा किया गया है। प्रभावित होने वाले अधिकांश मतदाताओं का संबंध मुस्लिम समुदाय से बताया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
आयोग की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई
निर्वाचन विभाग ने 22 अक्तूबर को एक विज्ञप्ति जारी कर माना कि पीलीभीत सदर में मई से अगस्त के बीच कुल 13,779 आवेदन फॉर्म-8 के माध्यम से प्राप्त हुए थे। इनमें से 10,470 आवेदनों को मंजूरी दी गई, जबकि 3,309 आवेदन अस्वीकार कर दिए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इन स्वीकृत आवेदनों का कोई भी ऑनलाइन या ऑफलाइन रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध नहीं मिला। जांच में कंप्यूटर असिस्टेंट और उस दौरान कार्यरत ईआरओ को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना गया है। नतीजतन, कंप्यूटर सहायक को सेवा से हटा दिया गया है और निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फॉर्म-8 का उपयोग आमतौर पर डेटा सुधार के लिए होता है, लेकिन यहां बिना उचित प्रक्रिया के नामों में हेरफेर हुई। अब प्रशासन ने उन सभी 10,470 स्वीकृत प्रविष्टियों की फिर से गहन जांच करने के आदेश दिए हैं ताकि सूचियों को दुरुस्त किया जा सके।
राजनीतिक आरोप और पुरानी समस्या का संदर्भ
कांग्रेस ने इस पूरी एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग करते हुए चुनाव आयोग के डिजिटल सॉफ्टवेयर ईसीआईनेट की सुरक्षा पर भी प्रश्न उठाए हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी प्रदेश की 100 विधानसभा सीटों की जांच कर सात पन्नों का ज्ञापन मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा है। पार्टी का आरोप है कि प्रदेश भर में कई जगहों पर डुप्लीकेट प्रविष्टियां मौजूद हैं और पूरी 403 विधानसभा सीटों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब बरेली समेत अन्य क्षेत्रों से भी एक ही महिला के नाम अलग-अलग आईडी नंबरों पर होने के उदाहरण सामने आते हैं। पिछले वर्ष 2025 में आयोग ने स्पष्ट किया था कि पुरानी विकेंद्रीकृत प्रणाली के कारण कई बार समान नंबर आवंटित हो जाते थे, लेकिन वर्तमान मामले में एक ही निर्वाचन क्षेत्र के भीतर ऐसी गड़बड़ियां किसी बड़ी चूक की ओर इशारा करती हैं। फिलहाल आयोग का इस पर कोई विस्तृत जवाब नहीं आया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने का दौर जारी है।