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मौसम का संकट: इस साल सबसे कमजोर मानसून का खतरा और खरीफ फसलों पर अल नीनो का व्यापक असर

देश में इस साल मानसून के कमजोर रहने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पैसिफिक महासागर में सक्रिय अल नीनो के प्रभाव से बादलों की आवाजाही और बारिश पर गहरा असर पड़ा है, जिससे कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।

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Ankit Yadav
25 अग 2026, 11:42
मौसम का संकट: इस साल सबसे कमजोर मानसून का खतरा और खरीफ फसलों पर अल नीनो का व्यापक असर
भारतीय मौसम विज्ञान और कृषि परिदृश्य पर इस वर्ष एक बड़ा संकट गहराता हुआ नजर आ रहा है। मौसम संबंधी गतिविधियों का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा समय में अल नीनो का प्रभाव काफी व्यापक हो चुका है, जिसके परिणाम स्वरूप इस सत्र के दौरान सामान्य से बहुत कम वर्षा होने की आशंका जताई जा रही है। मानसून की इस बेरुखी से देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं और जल स्रोतों का स्तर भी तेजी से नीचे गिर सकता है।

खरीफ फसलों पर सीधा असर

अन्नदाताओं की मेहनत पर इस कमजोर मानसूनी गतिविधियों का सीधा और गहरा प्रभाव पड़ता दिख रहा है। धान, मक्का, सोयाबीन और बाजरा जैसी मुख्य खरीफ फसलों की पैदावार इस बार भारी गिरावट का सामना कर सकती है। पर्याप्त पानी न मिलने के कारण खेतों में रोपाई का कार्य प्रभावित हुआ है और पहले से लहलहा रही फसलें भी सूखने की कगार पर पहुंच सकती हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले हफ्तों में मौसम ने करवट नहीं ली और अच्छी बारिश दर्ज नहीं की गई, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है जिसका असर अंततः बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ेगा। सरकार और संबंधित महकमे इस स्थिति से निपटने के लिए लगातार हालातों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और महासागरीय तापमान में हो रहे बदलावों के कारण मानसून का व्यवहार अब अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। अल नीनो जैसी परिघटनाएं भारतीय उपमहाद्वीप में मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देती हैं, जिससे बादलों का घनत्व घट जाता है और वर्षा का वितरण असमान हो जाता है। कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति तो वहीं अधिकांश हिस्सों में सूखे का सामना करना पड़ रहा है, जो देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यदि बारिश की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभालना एक बड़ी चुनौती साबित होगा। कृषि और खाद्य मंत्रालय के अधिकारी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं ताकि किसानों को इस आपदा से उबारने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं या राहत पैकेज तैयार किए जा सकें। भूमिगत जल का स्तर गिरने से सिंचाई के साधन भी सीमित होते जा रहे हैं, जिसके कारण किसानों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ रहा है। देश की संपूर्ण अर्थव्यवस्था चूंकि कृषि पर काफी हद तक निर्भर करती है, इसलिए इस वर्ष का कमजोर मानसून नीति निर्माताओं और आम जनता दोनों के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है।
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