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मौसम विभाग की चेतावनी: हिमाचल प्रदेश में तीन दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट, 145 सड़कें बंद
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिसके चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।
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Ankit Yadav
21 अग 2026, 18:47
उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों में मानसून का प्रकोप लगातार जारी है और खासकर हिमाचल प्रदेश में हालात खासे गंभीर बने हुए हैं। स्थानीय मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से दी गई ताजा जानकारी के अनुसार, अगले तीन दिनों तक राज्य के विभिन्न इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। इस चेतावनी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है और निचले तथा संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और राहत दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
पांच जिलों में रेड अलर्ट और जनजीवन पर असर
आज के दिन विशेष तौर पर पांच प्रमुख जिलों के लिए बारिश का भारी अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में लगातार हो रही तेज मानसूनी बौछारों के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई स्थानों पर शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। इसके अलावा लगातार हो रहे भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड और रास्तों पर पत्थरों के गिरने की घटनाओं के कारण परिवहन व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है।
राजधानी शिमला सहित विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात सेवाओं को सुचारू रखने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पूरे राज्य में वर्तमान समय में कुल 145 सड़कें पूरी तरह से बंद पड़ी हुई हैं। इनमें से कई महत्वपूर्ण मार्ग और संपर्क मार्ग शामिल हैं, जो ग्रामीण इलाकों को शहरी केंद्रों से जोड़ते हैं। सड़कों के अवरुद्ध होने के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है, और स्थानीय निवासियों को आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
प्रशासन की अपील और आगामी सुरक्षा कदम
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों के साथ-साथ आम नागरिकों से भी यह अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से यात्रा करने से बचें। खासकर उन इलाकों की यात्रा बिल्कुल न करें जहां भूस्खलन का खतरा सबसे अधिक रहता है। पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय चालकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि मौसम के मिजाज को देखते हुए स्थिति अचानक खतरनाक हो सकती है। संबंधित विभाग क्षतिग्रस्त सड़कों को साफ करने और यातायात को बहाल करने के लिए भारी मशीनों और कर्मियों को मैदान में उतार चुके हैं, हालांकि लगातार गिर रही बारिश के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी जिला मुख्यालयों पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं जो चौबीसों घंटे हालात पर नजर बनाए हुए हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि जब तक यह नया पश्चिमी विक्षोभ या मानसूनी सक्रियता कमजोर नहीं होती, तब तक राहत मिलने की कोई खास उम्मीद नहीं है। नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।