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राजनीति

आतंकवाद पर कड़ा रुख: मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के माध्यम से देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद कड़े शब्दों में अपनी बात रखी और देश की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया।

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Ankit Yadav
28 सित 2026, 17:26
आतंकवाद पर कड़ा रुख: मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन

मन की बात में आतंकवाद पर दो टूक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नियमित रेडियो प्रसारण मन की बात के नए संस्करण के दौरान देश और दुनिया के सामने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बेहद गंभीर विषयों पर खुलकर विचार रखे। इस कड़ी में उन्होंने आतंकवाद के नासूर का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि देश इसके खिलाफ अपनी लड़ाई में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा और इस वैश्विक समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सामूहिक संकल्प बेहद आवश्यक है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत ने हमेशा से शांति और भाईचारे का संदेश दिया है, किंतु जब राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने का प्रयास किया जाएगा, तब देश का नेतृत्व और उसकी सुरक्षा एजेंसियां पूरी ताकत के साथ मुंहतोड़ जवाब देंगी। इस दौरान उन्होंने देशवासियों से भी अपील की कि वे आंतरिक सुरक्षा के मामलों में पूरी तरह सतर्क रहें और राष्ट्र विरोधी ताकतों की हरकतों के प्रति अपनी आंखें खुली रखें क्योंकि सतर्क नागरिक ही किसी भी देश की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे मजबूत और पहला पहरेदार होता है।

सुरक्षा और कूटनीति का व्यापक परिदृश्य देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद हमेशा से एक जटिल चुनौती बना रहा है जिससे निपटने के लिए कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ मजबूत खुफिया तंत्र और सुरक्षा बलों की सतर्कता की आवश्यकता होती है। आधुनिक समय में इस नासूर का दायरा केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि साइबर स्पेस और वित्तीय नेटवर्क के जरिए भी इसके तार जुड़ते जा रहे हैं, जिसके कारण दुनिया भर की सरकारों को अपनी रणनीतियों में लगातार बदलाव करना पड़ रहा है। भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश के लिए, जो अपनी विविधता के लिए जाना जाता है, ऐसे तत्वों से निपटना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जो समाज में वैमनस्य फैलाना चाहते हैं और देश की प्रगति की रफ्तार को रोकना चाहते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी नीतियों का मूल्यांकन करते समय नीति निर्माता हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता और इसके लिए रक्षा बलों को आधुनिक हथियारों तथा तकनीकी उपकरणों से लैस करना समय की सबसे बड़ी मांग है। इसके अतिरिक्त, सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बुनियादी ढांचे को लगातार उन्नत किया जाता है ताकि किसी भी बाहरी दुस्साहस का तुरंत और प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

सामूहिक संकल्प और भविष्य की दिशा प्रधानमंत्री के इस प्रकार के संबोधनों का मुख्य उद्देश्य देश के आम नागरिकों के मन में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को जागृत करना और उन्हें आंतरिक सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार के साथ जोड़ना होता है। आने वाले दिनों में यह पूरी तरह अपेक्षित है कि सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया विभाग इन दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपनी रणनीतिक तैयारियों को और अधिक मजबूत करेंगे तथा देश विरोधी तत्वों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में तेजी लाई जाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि जब देश का नेतृत्व शीर्ष स्तर से इस तरह के स्पष्ट और कड़े संदेश देता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव प्रशासनिक अमले के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर भी पड़ता है। इसके साथ ही, यह आवश्यक है कि समाज का हर वर्ग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इन बातों को समझे और देश की एकता तथा अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रशासन का सहयोग करे ताकि एक सुरक्षित, शांत और प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके।

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