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बड़ी कार्रवाई: कर्नाटक के पीडब्ल्यूडी मंत्री जरकीहोली के ठिकानों पर ईडी का छापा, सांसद बेटी का परिसर भी खंगाला
कर्नाटक की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने राज्य के लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जरकीहोली और उनके परिवार से जुड़े कई परिसरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के दायरे में मंत्री की सांसद बेटी का परिसर भी शामिल बताया जा रहा है, जिससे राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है।
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Ankit Yadav
09 सित 2026, 10:43
कन्नड़ राजनीति और प्रशासनिक हलकों में मंगलवार को उस वक्त खलबली मच गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने कर्नाटक सरकार में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री सतीश जरकीहोली के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई ने न केवल राज्य के राजनीतिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया है, बल्कि विपक्षी दलों के बीच भी नए सिरे से चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह छापेमारी सुबह के वक्त शुरू हुई जब जांच अधिकारियों के कई दल अलग-अलग वाहनों में सवार होकर मंत्री से जुड़े परिसरों पर पहुंचे और दस्तावेजों को खंगालना शुरू किया।
सांसद बेटी के ठिकानों पर भी चली जांच
इस पूरी कार्रवाई का दायरा केवल मंत्री तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों और खासकर उनकी सांसद बेटी के परिसरों पर भी केंद्रीय जांच एजेंसी की पैनी नजर रही। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच दल ने विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों के कागजात और अन्य अहम दस्तावेजों की गहन छानबीन की है। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की बाधा से बचा जा सके। एजेंसी के अधिकारियों ने परिसरों के भीतर मौजूद दस्तावेजों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड्स को भी अपने कब्जे में लेकर जांच का दायरा विस्तृत कर दिया है।
कार्रवाई को लेकर शुरुआती दौर में विभिन्न प्रकार के कयास लगाए जा रहे हैं, हालांकि केंद्रीय एजेंसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जांच किसी पुराने मामले या वित्तीय अनियमितताओं के किसी संदिग्ध सिलसिले से जुड़ी हो सकती है, जिसके सुराग तलाशने के लिए यह कदम उठाया गया है। राज्य की राजनीति में इस तरह के हाई-प्रोफाइल कदम आमतौर पर बड़े राजनीतिक प्रभावों को जन्म देते हैं, और इस बार भी विपक्षी खेमे के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भीतर भी हलचल देखी जा रही है। मंत्री और उनके करीबियों के ठिकानों पर एक साथ हुई इस कार्रवाई से प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। विरोधी दलों के नेताओं ने इस मामले को लेकर सरकार और संबंधित मंत्रियों पर निशाना साधना शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी ओर मंत्री के समर्थकों और पार्टी के नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित कार्रवाई करार दिया है। उनका कहना है कि इस तरह के हथकंडों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं या उनके करीबियों को दबाने के लिए किया जा रहा है, जबकि सच्चाई अदालत और जांच प्रक्रिया के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगी।
आने वाले दिनों में इस मामले में कई और नए खुलासे होने की पूरी संभावना है क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय जुटाए गए दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर आगे की पूछताछ की तैयारी कर रहा है। यदि दस्तावेजों में कुछ गंभीर अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो आने वाले समय में मंत्री या उनके परिवार के सदस्यों को पूछताछ के लिए आधिकारिक तौर पर समन भी भेजा जा सकता है। फिलहाल, कर्नाटक की राजनीति का पूरा ध्यान इसी हाई-प्रोफाइल छापे और उससे जुड़ी हर एक नई जानकारी पर केंद्रित हो चुका है।