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राजनीति

मंत्रियों की क्लास: पीएम मोदी ने राज्यमंत्रियों से पूछा विकसित भारत के लिए खुद क्या किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यमंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए करीब तीन घंटे तक मैराथन बैठक की, जिसमें उन्होंने मंत्रियों से तीखे सवाल पूछे और देश के विकास के एजेंडे पर व्यक्तिगत योगदान का हिसाब मांगा।

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Ankit Yadav
09 सित 2026, 12:45
मंत्रियों की क्लास: पीएम मोदी ने राज्यमंत्रियों से पूछा विकसित भारत के लिए खुद क्या किया
भारतीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली चर्चा का विषय बन गई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिपरिषद के सदस्यों के साथ लंबी और गहन समीक्षा बैठक की। इस उच्च स्तरीय बैठक में खासतौर पर राज्यमंत्रियों के कामकाज और उनकी जिम्मेदारियों के निर्वहन की बारीकी से जांच की गई। प्रधानमंत्री ने लगभग तीन घंटे तक चली इस मैराथन कक्षा के दौरान मंत्रियों के सामने कई कड़े सवाल रखे और स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की सुस्ती या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को प्रशासनिक कसावट लाने और सरकारी मशीनरी को और अधिक जवाबदेह बनाने के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

कड़ा रुख और तीखे सवाल

प्रधानमंत्री मोदी की इस तीन घंटे की अनूठी क्लास में माहौल काफी गंभीर रहा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने एक-एक करके मंत्रियों से उनके विभागों के कामकाज का ब्योरा मांगा और उनसे सीधा सवाल किया कि देश को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के उनके संकल्प में उनका व्यक्तिगत योगदान क्या रहा है। उन्होंने मंत्रियों से यह भी पूछा कि उन्होंने अपने-अपने मंत्रालयों के भीतर सुधार लाने, नवाचार को बढ़ावा देने और जनता तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने के लिए कौन से नए और अनूठे कदम उठाए हैं। इस तरह के सीधे और तीखे सवालों ने कई मंत्रियों को अपने विभागों के प्रदर्शन पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया। प्रधानमंत्री का यह रुख साफ संकेत देता है कि अब केवल पद पर बने रहना काफी नहीं है, बल्कि परिणाम देना अनिवार्य है। इस समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना और शासन प्रणाली में पारदर्शिता लाना था। पिछले कुछ समय से सरकार का पूरा फोकस इस बात पर रहा है कि किस प्रकार भारत को वैश्विक मंच पर एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए नीतिगत फैसलों को जमीन पर उतारने की गति तेज करनी होगी और मंत्रियों को खुद आगे बढ़कर नेतृत्व करना होगा। प्रधानमंत्री ने बैठक में इस बात पर भी जोर दिया कि प्रत्येक मंत्री को अपने क्षेत्र और विभाग की हर छोटी-बड़ी गतिविधि की पूरी जानकारी होनी चाहिए। केवल अधिकारियों के भरोसे रहने के बजाय खुद मैदानी हकीकत से वाकिफ होना एक सफल नेतृत्व की पहचान है।

भविष्य की कार्ययोजना और दिशा-निर्देश

बैठक के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने सभी राज्यमंत्रियों को आने वाले दिनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर एक विभाग को मिशन मोड में काम करना होगा। जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को तुरंत दूर किया जाना चाहिए। इस उच्च स्तरीय मंथन के बाद माना जा रहा है कि आने वाले हफ्तों में कई मंत्रालयों के कामकाज के तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आंतरिक मूल्यांकन और कड़े दिशानिर्देशों से न केवल सरकारी कामकाज में सुधार आएगा, बल्कि मंत्रियों के बीच जवाबदेही तय करने में भी मदद मिलेगी। सरकार का यह कदम भविष्य की विकास यात्रा को गति देने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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