दिल्ली के प्रदर्शन से असदुद्दीन ओवैसी की दूरी
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अंदर मंगलवार को चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर विपक्षी दलों द्वारा एक विरोध मार्च निकाला गया था। इस कार्यक्रम में देश की कई विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने सड़क पर उतरकर अपनी बात रखी। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान एआईएमआईएम पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी इस विरोध प्रदर्शन से पूरी तरह दूर रहे। मंगलवार को तेलंगाना राज्य के मुख्यालय हैदराबाद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने खुद इस बात का खुलासा किया। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि वह उस विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और इसी वजह से उन्होंने इस सड़क मार्च में शिरकत नहीं की। ओवैसी ने अपनी बात को और स्पष्ट करने के लिए कहा कि जब वह उस समूह में शामिल ही नहीं हैं, तो वहां जाने का कोई औचित्य नहीं बनता है। उन्होंने इस स्थिति को अपने खास अंदाज में बयां करते हुए अपनी अनुपस्थिति के कारणों की व्याख्या की। इस दौरान विपक्षी मोर्चे से जुड़ी कुल 19 पार्टियों ने संसद भवन के मकर द्वार से लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला था।
मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया पर आपत्ति
कार्यक्रम के दौरान एआईएमआईएम के प्रमुख नेता ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की मौजूदा प्रणाली को लेकर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह से कार्यपालिका यानी सरकार के पक्ष में झुकी हुई है और इसमें तुरंत बदलाव करने की आवश्यकता है। ओवैसी के मुताबिक शीर्ष चुनावी अधिकारी के चयन का वर्तमान तरीका ही इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था आनी चाहिए जिसमें सरकार के साथ-साथ देश के विपक्ष और न्यायपालिका की भी महत्वपूर्ण भूमिका तय की जा सके। उनके अनुसार देश के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता को मिलकर मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन करना चाहिए। ओवैसी ने यह भी दोहराया कि चुनाव आयोग की पूरी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कानूनों में संशोधन किया जाना बेहद जरूरी है। दूसरी तरफ मंगलवार को ही दिल्ली में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेता बैरिकेडिंग पार कर आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे थे जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था।
बिहार के विशेष गहन पुनरीक्षण पर तीखा हमला
असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव प्रक्रिया के साथ-साथ बिहार राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का भी कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने दावा किया कि बिहार में इस एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भी उन्होंने लगातार अपनी आवाज उठाई थी और यह पूरी प्रक्रिया बिल्कुल सही नहीं है। ओवैसी का आरोप है कि यह एसआईआर कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह पिछले दरवाजे से लाया गया राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए इन सभी व्यवस्थाओं की नए सिरे से समीक्षा की जानी चाहिए। राजनीतिक गलियारों में ओवैसी के इन बयानों को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विपक्षी दल पहले से ही चुनाव आयोग के खिलाफ लामबंद होकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। मंगलवार को दिल्ली में हुए उस प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था और कुछ देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। ओवैसी के इन बयानों ने देश की चुनावी राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है जिसमें चयन प्रक्रिया और एसआईआर जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।