सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सुनवाई
देश की सर्वोच्च अदालत ने आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त को फौरन हटाने की याचिका पर कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद अदालत ने चुनाव आयोग के अलावा केंद्र सरकार और अन्य सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनसे विस्तृत जवाब तलब किया है। इस दौरान न्यायाधीशों ने विशेष रूप से फॉर्म 6 का मुद्दा उठाया और स्पष्ट किया कि इसमें किए गए संशोधनों को अदालत से कोई मंजूरी नहीं मिली थी। अदालत अब यह जांचना चाहती है कि इन दस्तावेजों में बदलाव करने के पीछे आखिर किसका हाथ था। निर्वाचन आयोग की तरफ से यह दलील दी गई है कि उनके द्वारा लिए गए सभी निर्णय नियमों के दायरे में रहकर किए गए हैं और कागजात सामने आने पर सारी स्थिति अपने आप साफ हो जाएगी। इसी बीच अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अपनी एक सार्वजनिक टिप्पणी में इस प्रक्रिया को पूरी तरह से गैर-कानूनी करार दिया है और सर्वोच्च अदालत से इस विवाद पर बिना किसी देरी के जल्द से जल्द फैसला सुनाने की अपील की है।
दिल्ली में प्रदर्शन और राजनीतिक दलों की रणनीति
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि देश में कोई भी महिला यदि सवाल पूछती है तो उसे जबरन चुप कराने का प्रयास किया जाता है। विरोध प्रदर्शन करने वाले एक अन्य राजनीतिक दल कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने भी अपनी तरफ से एक बड़ा दावा पेश किया है। उन्होंने मीडिया के सामने आशंका जताई कि पुलिस उनके संगठन के नेता अभिजीत दीपके समेत कई अन्य प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार करने की योजना बना रही है। हालांकि सरकार की तरफ से इन दावों या गिरफ्तारियों की संभावना को लेकर किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है। विरोध प्रदर्शन में शामिल इन समूहों की अपनी अंदरूनी रणनीतियों में भी तालमेल की कमी साफ नजर आ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभिजीत दीपके चाहते हैं कि विपक्ष आगामी चुनावों के बहिष्कार जैसा कोई कड़ा कदम उठाए। इसके विपरीत अरविंद केजरीवाल का यह मानना है कि चल रहे आंदोलन का दायरा और अधिक व्यापक किया जाना चाहिए। दोनों नेता अभी तक एक-दूसरे के समर्थन का इंतजार कर रहे हैं जिससे यह साबित होता है कि उनका साझा विरोध होने के बावजूद उनकी कार्ययोजनाएं बिल्कुल अलग दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
उत्तर प्रदेश और बिहार में सीटों के लिए घमासान
उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं। राज्य की बड़ी पार्टियों के अलावा छोटे क्षेत्रीय दल और कई नेता कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के संपर्क में लगातार बने हुए हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत का दौर अभी भी जारी है। इसके साथ ही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने भी अपनी चुनावी रणनीति साफ कर दी है और समाजवादी पार्टी के साथ समझौता न होने पर वह दो सौ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। बिहार की राजनीति में भी कुछ इसी तरह की तस्वीर देखने को मिल रही है जहां विधान परिषद चुनाव के दौरान उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक मोर्चा में मतभेद उभरकर सामने आ गए हैं। उनकी पार्टी के तीन विधायकों ने एनडीए समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ जाकर बगावत कर दी है हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया है कि वे एनडीए सरकार का पूरा समर्थन कर रहे हैं। इन सबके बीच भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने आठ उम्मीदवारों की सूची का ऐलान कर दिया है। इस सूची में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को इस बार पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। उनकी जगह योगी सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह समेत आठ नेताओं को मैदान में उतारा गया है ताकि संगठन और सामाजिक समीकरण दोनों को मजबूती दी जा सके।