दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होते ही जबरदस्त राजनीतिक गहमागहमी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। आम आदमी पार्टी के छह वरिष्ठ विधायक — संजीव झा, जरनैल सिंह, कुलदीप कुमार, प्रेम कुमार, सोम दत्त और अजय दत्त — सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई स्लोगन लिखी टी-शर्ट पहनकर सदन में पहुंचे थे। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधायकों द्वारा पहनी गई इन टी-शर्टों को 'आपत्तिजनक' और सदन की गरिमा के प्रतिकूल करार देते हुए उन्हें तुरंत उतारने या परिधान बदलने का कड़ा निर्देश दिया। जब आप विधायकों ने अध्यक्ष के निर्देश को अनदेखा किया और नारे लगाने बंद नहीं किए, तो अध्यक्ष ने सुरक्षाकर्मियों तथा मार्शलों को बुलाकर छहों विधायकों को जबरन सदन से बाहर निकलवा दिया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सदन में विपक्षी और सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के पीछे की मुख्य वजह बताते हुए आम आदमी पार्टी के विधायकों और नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार द्वारा छात्राओं के लिए साइकिल खरीद की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार किया गया है। विधानसभा परिसर के बाहर भी आप कार्यकर्ताओं और विधायकों ने विरोध दर्ज कराने का अनूठा तरीका अपनाया; वे हाथों में तख्तियां लेकर और साइकिल चलाकर विधानसभा परिसर पहुंचे थे। आप नेताओं का दावा है कि बाजार में जो साइकिलें साधारण दरों पर उपलब्ध हैं, सरकार ने उन्हें काफी अधिक दामों पर खरीदकर निविदा प्रक्रिया में बड़ा घोटाला किया है। विरोध कर रहे विधायकों ने स्पष्ट किया कि वे जनहित के इस बड़े मुद्दे को दबाने नहीं देंगे और सदन के अंदर तथा बाहर निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
अध्यक्ष की कार्रवाई और विपक्ष का पलटवार
सदन के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधायकों को बाहर निकालने के अपने फैसले को पूरी तरह नियमानुकूल और उचित ठहराया। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्षी सदस्य जनहित के अति महत्वपूर्ण विषयों और बजट चर्चा में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विधानसभा की नियमावली स्पष्ट रूप से किसी भी प्रकार के प्रचार या विरोध प्रदर्शन वाले कपड़ों, स्लोगन वाली टी-शर्ट या तख्तियों को पहनकर सदन के भीतर आने की अनुमति नहीं देती है। अध्यक्ष के अनुसार, सदन की गरिमा बनाए रखना सर्वोपरि है और संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन करने वाले किसी भी आचरण को सहन नहीं किया जा सकता।
दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी के प्रदेश नेतृत्व और निष्कासित विधायकों ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से गैर-लोकतांत्रिक और तानाशाही भरा कदम करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार विपक्ष की निष्पक्ष आवाज और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाले सवालों से पूरी तरह डरी हुई है। आप नेताओं ने कहा कि जब जनप्रतिनिधियों को जनता से जुड़े मुद्दों पर बहस करने से रोका जाता है, तो उनके पास विरोध दर्ज कराने के सिवा कोई अन्य रास्ता नहीं बचता। इस पूरी घटना के बाद दिनभर विधानसभा परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखे हमले जारी रखे।